अक्टूबर समीक्षा

रामअवतार अग्रवाल

व्यवसायी व समाजसेवी सीकर
निवासी-कोलकाता प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९८३०५५६६५२

हाराज अग्रसेन हम अग्रवालों के पूर्वज है, हमारे लिए पूज्यनीय हैं, उनके विचार आज भी समाज में प्रतिपादित हो रहे हैं। मोदी जी तो आज कहते हैं ‘सबका साथ-सबका विकास’ पर युग पुरूष अग्रसेन जी ने ‘एक र्इंट-एक रूपया’ सिद्धांत के माध्यम से सम्पूर्ण समाज के विकास को सुनिश्चित किया। आज भी उनके वंशजों द्वारा चाहे वे कहीं भी निवास करते हों, इस विचारों का अनुसरण करते आ रहे हैं। समाज के लोग अपनी योग्यता अनुरूप इसका लाभ उठाने में सक्षम हैं। आज इस स्वार्थ की दुनिया में लोग अपने में ही व्यस्त रहते हैं तो दूसरों के बारे में सोचने का समय नहीं मिल पाता, फिर भी कुछ अंश में महाराज अग्रसेन के विचारों, सिद्धांतों का अनुकरण किया जा रहा है। आपका जन्म १९५४ में प.बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुआ, आपकी प्रारंभिक शिक्षा कक्षा ७ तक कोलकाता में ही सम्पन्न हुई, कक्षा ८ से ११ तक की शिक्षा आपने ‘पिलानी’ से प्राप्त की, अर्थात् १९६८ से १९७१ तक आपको पिलानी में प्रवास करने का अवसर मिला, तत्पश्चात जयपुर के मालवीया रिजनल इंजिनियरिंग कॉलेज में १९७१ से १९७६ तक आपने मैकेनिकल इंजिनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की, जो अब एन.आय.टी. में तब्दील हो गया है। 

भारत में जितने भी एन.आय.टी. हैं उसमें यह संस्था तीसरे स्थान पर है। शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात कोटा राजस्थान में एक वर्ष तक श्रीराम केमिकल्स एण्ड फर्टिलाइजर वंपनी में कार्यरत रहे, जहां आपकी नियुक्ति कॉलेज से ही हो गई थी, पर अपने जन्म स्थान व परिवार से दूर न रह पाने के कारण आप १९७७ में पुन: कोलकाता आकर बस गए, यहां के टेक्सनोको लिमिटेड वंपनी जो बिरला ग्रुप की है, में कार्यरत हुए तब से अब तक इस संस्था से जुड़े हैं। वर्तमान में वंपनी में वाईस प्रेसिडेंट (स्टील) के पद पर कार्यरत हैं, अपने कार्य के साथ आप सामाजिक संस्था से भी जुड़े हुए है। कोलकाता के सीकर नागरिक परिषद में कार्यकारी सदस्य के रूप में जुड़े हैं। आपका पैतृक निवास राजस्थान के सीकर जिले का पलसारा गांव है जहां आपका फार्म हाउस भी है, वर्ष में एक बार अवश्य जाना होता है। कोलकात्ता में जितने भी मारवाड़ी परिवार निवास कर रहे हैं सभी अपनी संस्कृति को संजोये हुए हैं। मारवाड़ी परिवार में आज भी राजस्थानी भाषा का ही उपयोग होता है, पर आज की नई पिढी अपनी मातृभाषा के बजाय अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करने लगी है, जो की नहीं होना चाहिए, इसी तरह हमारी राष्ट्रभाषा का संवैधानिक सम्मान न मिल पाने के कारण ‘हिंदी’ अपनी अहमियत खोती जा रही है, हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान मिलना ही चाहिए। ‘मेरा राजस्थान’ बहुत ही बढ़िया पत्रिका है, इसमें प्रकाशित लेख व ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी पठनीय व ज्ञानवर्धन रहती है, पत्रिका हम प्रवासी राजस्थानियों को अपनी मिट्टी से जोड़े रखती है, जिसके लिए पत्रिका परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ।

बूंद-बूंद से सागर बन सकता है उसी तरह महाराज अग्रसेन की ‘एक र्इंट-एक रूपया’ के सिद्धांत को आज भी सम्पूर्ण अग्रवाल समाज अपनाया हुआ है। एक-दूसरे की मदद करने को लोग तत्पर रहते हैं, आज भी लोग एक-दूसरे का सहयोग देकर समाज व देश के विकास में सहयोग प्रदान कर रहे हैं, इसी प्रकार किसी भी संस्था द्वारा किया जानेवाला सामाजिक व धार्मिक कार्यों को सफल बनाने हेतु सम्पूर्ण समाज का सहयोग आवश्यक है। प्रत्येक समाज का हर व्यक्ति यदि महाराज अग्रसेन के इस नीति का अनुसरण करे तो समाज सम्पन्न व विकसित होगा, इसीलिए अग्रवाल समाज का देश के विकास में योगदान के साथ, शिक्षा, सेवा, स्वास्थ, व्यापार आदि क्षेत्र में अग्रणी है। अग्रसेन महाराज की जयंति बड़ी धूम-धाम से मनाइ जाती है, आज भी महाराज अग्रसेन का ‘एक र्इंट-एक रूपया’ का संदेश चल  पूर्व मेरे दादाजी  आकर

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नरेश अग्रवाल

  व्यवसायी व समाजसेवी
सीकर निवासी-आसनसोल निवासी
भ्रमणध्वनि: ९४३४०२९४२६

जामुड़िया  बस गये, मेरा जन्म व सम्पूर्ण शिक्षा जामुड़िया में ही हुई है। पिछले १५ वर्षों से व्यवसाय हेतु आसनसोल का प्रवासी हूँ, यहां हमारा ‘पुड ग्रेन’ का कारोबार है। आसनसोल स्थित कई सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं में सेवारत हूँ। श्री गणेश पुजा समिति, आसनसोल में अध्यक्ष पद पर व अग्रवाल समाज के मारवाड़ी मित्र सेवा समिति, आसनसोल चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स में सेवारत हूँ। आज ‘हिंदी’ सीखने विदेशों से लोग भारत में आते है, ‘हिंदी’ में जो मिठास है वो अन्य भाषा में नहीं, हिंदी से आज देश का प्रत्येक नागरिक जुड़ा है, अत: ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान अवश्य प्राप्त होना चाहिए। महाराज अग्रसेन का ‘एक र्इंट-एक रूपया’ का संदेश चल रहा है। हमारा परिवार मूलरूप से राजस्थान के सीकर जिले में स्थित मांउडा का निवासी है, लगभग १०० वर्ष

रविशंकर जांगिड

अध्यक्ष
अखिल भारतीय जांगिड ब्राह्मण महासभा
सिकर निवासी-जयपुर प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९४१४११०६२७

अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण महासभा की स्थापना ११३ वर्ष पूर्व लाहोर में की गई थी, तभी से यह समाज दिन-दुगनी प्रगति कर रहा है। वर्तमान भारत में १६ प्रांत इकाई है व १६ प्रदेश अध्यक्ष, सभी जिलों में जिलाध्यक्ष हैं व सभी में तहसील अध्यक्ष है, आज एक लाख से भी ज्यादा महासभा के सदस्य हैं। फरवरी में विश्वकर्मा जयंति व सितंबर में विश्वकर्मा पूजन दिवस बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। समाज के सभी लोगों द्वारा अपने कार्यक्षेत्र विशेष पूजा आयोजित की जाती है, सामाजिक संस्थाओं द्वारा सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। भगवान विश्वकर्मा जी हमारे आराध्य हैं, उन्हीं की पूजा अर्चना हम करते हैं, जिसमें समाज के सभी लोग शामिल होकर एकता का परिचय देते हैं। हम अंगिरा ऋषि के वंशज हैं। ९९³ समाज के लोग शिक्षित हैं। गत दशकों में समाज ने तिव्रता से प्रगति की है बेटी हो या बेटा सभी को समान अधिकार प्रदान किया जाता है। आज हमारे समाज के डाक्टर, इंजिनियर, शिक्षक, व्यापारी सभी क्षेत्रों में सक्रिय हैं,  व विशिष्ट

 पदों पर कार्यरत है। केवल राजनीति में हमारी भागीदारी कम है जिसमें अब समाज रूचि ले रहा है। दोनों मुख्य राजनीतिक पार्टियों से अपिल की है कि भारत सरकार में हमारा भी जनप्रतिनिधि शामिल हो, जिससे समाज को लाभ प्राप्त हो। हमारा परिवार मूलत: राजस्थान के सिकर जिले का निवासी है, जहां से मेरे पिताजी जयपुर के बनीपार आकर बस गए। मेरा जन्म व सम्पूर्ण शिक्षा बनीपार में ही सम्पन्न हुयी, व्यवसायिक तौर पर इंजिनियरिंग के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी निभाता हूँ। अखिल भारतीय जांगिड ब्राह्मण महासभा में १९८५ में जुड़ा, २००५ में चित्तौर जिले का अध्यक्ष बना, २०१३ से २०१८ तक राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहा व वर्तमान में महासभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हूँ, महासभा व जिला इकाई द्वारा विभिन्न सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु सम्मान व पुरस्कार दिया जाता है। रक्तदान शिविर व यह कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है, हम सभी को सर्वप्रथम अपनी मातृभाषा को प्रधानता देनी चाहिए और सभी मातृभाषा को जोड़ने वाली भाषा ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान अवश्य मिलना चाहिए, ‘हिंदी’ के माध्यम से हमारा देश का सर्वांगिण विकास संभव है।

 राजस्थान के नवलगढ़ स्थित सिगनौर के निवासी हैं, वर्तमान में महाराष्ट्र के धुले के प्रवासी हैं, जहां सर्वप्रथम मेरे दादाजी के छोटे भाईसाहब आये व उनके बाद धीरे-धीरे परिवार के सभी लोग यहां आकर बस गए, मेरा जन्म स्थान सिगनौर है व सम्पूर्ण शिक्षा धूले में हुई है, यहां हमारा कपड़ों व सुगर का कारोबार रहा, वर्तमान में हमारा रिसॉर्ट व न्यूट्रिशन पुट व ट्रेडिंग का कारोबार है, राजनीति में मेरी रूचि रही है, भाजपा में तीन बार अध्यक्ष पद पर कार्यरत रहा, साथ ही धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं से जुड़ा हूँ। अग्रवाल समाज धुले में अध्यक्ष पद पर रहा। अखिल भारतीय अग्रवाल समाज में संगठन मंत्री के पद पर भी कार्यरत हूँ। श्री गजानंद नागरी सहकारी पतसंस्था में १८ सालों से अध्यक्ष पद पर सेवारत हूँ साथ ही हमारा एक विद्यालय चलता है जिसमें विद्यार्थींयों को भोजन, गणवेश, आदि वस्तुएं मुफ्त प्रदान की जाती है। महाराज अग्रसेन  की समाजवादी विचारधारा हम मूलत:

ओम प्रकाश अग्रवाल

व्यवसायी व समाजसेवी
नवलगढ़ निवासी-धूले प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९४२२२८५४१७

क्रियान्वयन से व उनके सिद्धांतों पर चलकर ही आज अग्रवाल समाज ‘एक र्इंट-एक रूपया’ का सिद्धांत पैला रहे हैं, वर्तमान में इसका स्वरूप अवश्य बदल गया है पर सिद्धांत वही है जो सहयोग स्वरूप है, आज भी समाज में विभिन्न तरह से लोग एक-दूसरे की सहायता करने में तत्पर रहते हैं, हम अपने समाज और देश को एक नई दिशा दें और आगे बढ़ाते रहे, अग्रवाल समाज से कई सारे नामचीन व्यक्ति हुए हैं, उन्होंने अपने देश का नाम आगे बढ़ाने में उद्यम किया है, अग्रसेन जयंती हमारे लिए एक बड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, हमारे यहां अग्रसेन जयंती पर तीन दिनों का सांस्वृृâतिक, प्रतिस्पर्धा, पुरस्कार आदि कार्यक्रम किए जाते हैं, जिसमें समाज के सभी लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका बहुत ही बढ़िया पत्रिका है, हमें राजस्थान की प्रतिभा, संस्कृति के साथ इतिहास से भी अवगत कराती है, हमें हमारे राजस्थान के बारे में जानकर बहुत आनंद मिलता है, जिसके लिए ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका परिवार धन्यवाद के पात्र हैं। ‘हिंदी’ को भी राजभाषा से राष्ट्रभाषा की संवैधानिक मान्यता मिले, ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा से गौरवान्वित कर इसके विकास पर जोर देना चाहिए।

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नरेश अग्रवाल

राजस्थान निवासी-जमशेदपुर प्रवासी
व्यवसायी व समाजसेवी
भ्रमणध्वनि: ९३३४८२५९८१

महाराज अग्रसेन के ‘एक र्इंट एक रूपया’ का सिद्धांत वर्तमान में सहयोग-सहायता के रूप में जीवित है। समाज में जो जरूरतमंद व गरिब है उन्हें सहयोग प्रदान करना ही मुख्यरूप है, यही नहीं महाराजा अग्रसेन जी के द्वारा समाजवाद से संबंधित अनेक सिद्धांत प्रतिपादित किया है जिसका निर्वाह आज उनके वंशजों द्वारा किया जा रहा है, उन्हीं के आशीर्वाद स्वरूप आज उनके वंशज सभी क्षेत्रों में समृद्ध, सम्पन्न व अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, उनके वंशजों ने हर क्षेत्रों में प्रगति की है, महाराज अग्रसेन जी के बारे में बहुत ही कम साहित्य प्राप्त हैं। गत कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में भी अग्रवाल समाज के लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। हम मूलत: राजस्थान के निवासी हैं, जहां से मेरे दादाजी लगभग १०० वर्ष पूर्व जमशेदपूर आकर बस गए, जब जमशेदजी टाटा ने यहां कम्पनी स्थापित कर रहे थे। काफी मेहनत व संघर्ष के बाद आज हमारा परिवार 

समृद्ध  व सम्पन्न है। वर्तमान में हमारा मशीनों के कलपूर्जों की एजेंसी का कारोबार है। मेरी लेखन में रूचि है  व लेखक के रूप में भी कार्यरत हूँ, जिसमें कविताएं, सूक्ति, प्रार्थनाएं आदि रचित हैं, ‘मरूधर के स्वर’ नामक पत्रिका का संपादन १० वर्षों से कर रहा हूँ, साथ ही यहां स्थित कई सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से जुड़ा हूँ। ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक मान्यता मिले, क्योंकि ‘हिंदी’ का अपना एक स्थान है। देश की संस्कृति से जुड़ी हुई ‘हिंदी’ को शीघ्र ही राष्ट्रभाषा से गौरवान्वित कर इसके विकास पर जोर देना चाहिए।

अग्रवाल समाज की नींव रखने वाले अग्रसेन महाराज को मेरा प्रणाम, उनका समाज के प्रति नजरिया और संदेश से मैं प्रभावित हूँ जो कि दूसरे की मदद करना और उन्हें स्वयं के पैरो पर खड़े होने को प्रेरित करना है। अग्रवाल समाज हमेशा ही इस दिशा में कार्यरत है। सफल जीवन जीने का मार्ग बताया, उन्होंने सिखाया कि हमें अपने साथ रहने वाले लोगों को मदद करनी चाहिए और उन्हें स्वयं के पैरों पर खड़े रहने के लिए प्रेरित करना चाहिए। अग्रवाल समाज हमेशा जरूरतमंदों की मदद करने के लिए तत्पर रहता है। राजस्थान का मुवुंदगढ़ मेरा मूल निवास स्थान है, मेरी स्नातक तक की शिक्षा मुवुंâदगढ़ में सम्पन्न हुई व १९८३ में मुंबई आना हुआ, फाइनेंस से एमबीए की शिक्षा प्राप्त की, एक प्रतिष्ठित कम्पनी में कार्यरत रहा, मुंबई स्थित मुवुंदगढ़ नागरिक परिषद के साथ अन्य सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से जुड़ा हूँ। मेरा राजस्थान’ पत्रिका अपने आप में सम्पूर्ण पत्रिका है, पत्रिका में राजस्थान के विभिन्न गांवों का इतिहास, संस्कृति, कला और वहां के जीवन का सम्पूर्ण 

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राम गोपाल सुरोलिया

नौकरी पेशा व समाजसेवी
मुवुंदगढ़ निवासी -मुंबई प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९९८७५२२४२१

लेखा-जोखा पढने को मिलता है, जिससे हमें राजस्थान में होने का एहसास होता है, इस बात से हम बहुत प्रभावित हैं और पत्रिका परिवार का धन्यवाद करते हैं। ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान अवश्य प्राप्त होना चाहिए, साथ ही सभी राज्यों की राज्यभाषा का सम्मान भी अवश्य बढे, हम सभी को जोड़ने वाली एक मूल भाषा अवश्य होनी चाहिए, ‘हिंदी’ से आज सभी जुड़े हैं, अत: इसका अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए। 

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किशन केडिया

व्यवसायी व समाजसेवी
सीकर निवासी-मुंबई प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९८२००७२७१३

७२ वर्षिय किशन केडिया एक प्रतिष्ठित स्टील व्यवसायी हैं साथ ही आप कई सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से जुड़कर अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, आप १९५५ से मुंबई के प्रवासी हैं, आपके परिवार से आपके दादाजी सर्वप्रथम १८९० में मुंबई आए तभी से आपका परिवार मुंबई का प्रवासी है। मुलत: आप राजस्थान के सीकर के निवासी हैं, आपका जन्म व प्रारंभिक शिक्षा सीकर में ही सम्पन्न हुई है, आपने अधिक शिक्षा प्राप्त नहीं की है फिर भी अपनी मेहनत व लगन के बलबुते पर मात्र २१ वर्ष की आयु से ही आपने स्टील का कारोबार प्रारंभ किया, १९८८ में आपने वास्तु निर्माण का व्यवसाय आरंभ किया। महाराज अग्रसेन की प्रेरणा व कृपा से ही आज अग्रवाल प्रत्येक क्षेत्र में कार्यरत हैं चाहे व सरकारी क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र हो या हो मानव सेवा, अग्रवाल समाज अहम भूमिका निभा रहे हैं। आज अग्रवाल समाज की एकता का मुख्य कारण महाराज अग्रसेन द्वारा बताए गए

सिद्धांत हैं  जिसका पालन आज भी अग्रसेन के वंशज निभा रहे हैं। ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका का मैं नियमित पाठक हूँ, पत्रिका में प्रकाशित लेख, जानकारी व राजस्थानों के गांवों के बारे में जानकारी अति उत्तम व ज्ञानवर्धक होती है, जिसके लिए पत्रिका परिवार को शुभकामनाएं देता हूँ। ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक सम्मान दिलाने के लिए सम्पादक बिजय कुमार जैन द्वारा किया जा रहा प्रयास अति सराहनीय है, यह आवश्यक भी है क्योंकि ‘हिंदी’ हमारी पहचान है, अत: हिंदी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार अवश्य प्राप्त होना चाहिए।

हमें गर्व है कि महाराज अग्रसेन के हम वंशज हैं, वे हमारे लिए पूजनीय हैं, उन्होंने समाजवाद का जो सिद्धांत अपने काल में लाए वे आज भी अग्रवाल समाज के लोगों द्वारा अपनाया जा रहा है, तभी हर क्षेत्र में अग्रवाल समाज अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, महाराज अग्रसेन के सिद्धांतों को वास्तविक रूप में जीवन में अपनाकर ही उच्च मुकाम पा सकते हैं, धार्मिक कार्यों व दान- धर्म में भी अग्रवाल बंधु अपनी प्राथमिकता दर्जा करवाते हैं,कार्यों को सम्पन्न किया जाता है, साथ ही अग्रसेन जयंती के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें समाज के सभी वर्ग के लोग उत्साह पूर्वक सहभागी होकर कार्यक्रम को सफल बनाते है। वर्तमान में मेरी आयु ७१ वर्ष की है, हम मूलत: राजस्थान के सुजानगढ़ के रहने वाले हैं, जहां से कई वर्ष पूर्व हमारे दादाजी-पिताजी कोलकात्ता आकर बस गए, मेरा जन्म व प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में ही सम्पन्न हुई,व 

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देवेन्द्र प्रसाद जाजोदिया

व्यवसायी व समाजसेवी
सुजानगढ़ निवासी- कोलकात्ता प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९३३१८६०००१

बैचलर ऑफ  इंजिनियरिंग की शिक्षा बिट्स-पिलानी से प्राप्त की। जय बालाजी इंड्रस्टीज नाम स्टील निर्माण का कारोबार है, साथ ही अन्य कई स्थानों पर हमारी पैक्ट्रीयां है, इसके साथ कोलकात्ता स्थित कई सामाजिक संस्थाओं में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में सेवारत हूँ, व्यक्तिगत रूप से भी धार्मिक कार्यों में संलग्न रहता हूँ। ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका एक उच्च कोटी की पत्रिका है, हमें राजस्थान के कोने-कोने की ऐतिहासिक जानकारी मिलती है, साथ ही हम राजस्थानियों को रहने के लिए निर्देशित करती है जिसके लिए ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका धन्यवाद के प्राप्त हैं। एकत्र हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाने के लिए सम्पादक बिजय कुमार जैन द्वारा प्रयास किया जा रहा है जो कि अति सराहनीय है, जिसका हम सम्पूर्ण रूप 

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कैलाश चंद्र अग्रवाल

चार्टड अकाउंटेंट व समाजसेवी
खिरोड (झुंझुनुं) निवासी-कोलकाता प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९३३११४७३९४

कोलकाता में प्रतिष्ठित सी.ए. व समाजसेवी के रूप में कैलाशचंद्र जी विख्यात हैं, आपका परिवार मूलत: राजस्थान के झुंझुनुं जिले में खिरोड का निवासी है, जहां से आपके पिताजी व्यवसाय के लिए उत्तर प्रदेश के सीतापुर आकर बस गए, आपका जन्म व प्रारंभिक शिक्षा खिरोड में सम्पन्न हुई, तत्पश्चात कक्षा ८ वीं से लेकर इंटर तक की शिक्षा सीतापुर में ग्रहण की। वाणिज्य संकाय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने हेतु १९६४ में लखनऊ विश्वविद्यालय से आपने शिक्षा प्राप्त की व एल.एल.बी. व सी.ए. की शिक्षा प्राप्ति हेतु १९६९ में आपका कोलकाता आना हुआ तभी से आप कोलकाता के प्रवासी हैं। सी.ए. कार्यक्षेत्र को ही आपने व्यवसाय के रूप में चुना व आज एक प्रतिष्ठित सी.ए. बनें हैं। आपके दो पुत्र हैं बड़ा बेटा व्यवसाय से जुड़ा है व छोटा बेटा भी सी.ए. के रूप में कार्यरत है। व्यवसाय के साथ-साथ आप सामाजिक क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, आपने ‘देवकी मेमोरियल स्वूल’ की स्थापना २००२ में की, जिसमें आप चेयरमेन के रूप में कार्यरत हैं। बांगुड़ एवेन्यु संसद 

स्वयंसेवी संस्था के एकमेव ट्रस्टी के साथ अन्य कई संस्थाओं में भी विशेष पदों पर कार्यरत हैं। महाराज अग्रसेन हमारे पूर्वज व पूजनीय है उन्होंने ‘एक र्इंट-एक रूपया’ के माध्यम से समाजवाद के सिद्धांत को प्रस्तुत किया, जिसे आज भी सम्पूर्ण समाज द्वारा इसे अपनाया जा रहा है, हमारे समाज को अच्छे संस्कार मिले जिसके कारण हमलोग एक दूसरे की मदद करते हैं। महाराज अग्रसेन के आशीर्वाद से ही आज अग्रवाल समाज के लोग सभी क्षेत्रों में उच्च मुकाम पर कार्यरत हैं, समाज व देश सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका का मैं नियमित पाठक हूँ, पत्रिका के माध्यम से राजस्थान से जुड़ने का अवसर प्राप्त होता है। राजस्थान के गावों, वहाँ के रिति-रिवाज, संस्कृति-सभ्यता व समाज आदि की ज्ञानवर्धक बातें ज्ञात होती है, जो एक उत्तम माध्यम है, पत्रिका हम राजस्थानियों को एकत्र रहने के लिए निर्देशित करती है जिसके लिए पत्रिका परिवार को धन्यवाद करते हैं। ‘हिंदी’ हमारी भाषा है, हिंदी से देश के सामान्य वर्ग से लेकर उच्च वर्ग सभी जुड़े हुए हैं। ‘हिंदी’ के माध्यम से ही देश के विभिन्न भाषायी आपस में सम्पर्व स्थापित कर सकते हैं, ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक सम्मान अवश्य प्राप्त होना चाहिए।

‘एक र्इंट एक रूपया’ ये सूत्र हमें महाराजा अग्रसेन ने दिया है, उन्होंने हमें यह सीख दी कि अपने लोगों की मदद करनी चाहिए, ताकि सभी अपना घर बना सके व व्यापार स्थापित कर सक्षम बन सके, दूसरों की सहायता कर सके, हमें गर्व है कि हम ‘अग्र’ महाराज अग्रसेन के वंशज हैं, उनसे हमारे समाज को अच्छे संस्कार मिले हैं, जिसके कारण हमलोग एक-दुसरे की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं, हम अग्रवाल समाज सेवा में भी अग्रणीय हैं। मेरा जन्म १६ अगस्त १९४७ को राऊरकेला, उड़िसा में हुआ व सम्पूर्ण शिक्षा भी यहीं सम्पन्न हुई। मेरे दादाजी के समय से हमारा परिवार यहां निवासित है, गत ५० वर्षों से हम सहपरिवार कोलकाता में प्रवास कर रहे हैं मूलत: हम राजस्थान के नवलगढ़ के निवासी हैं, कोलकाता में हमारा रेल्वे कांक्रिट का व प्लास्टिक का कारोबार है, राजस्थान स्थित भिवाड़ी में भी हमारी पैक्ट्री है। राऊरकेला स्थित कई सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से जुड़ा हूँ व राऊरकेला में गायत्री मंदिर का निर्माण करवाया है, हमारा 

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केशरचंद्र पाडिया

व्यवसायी व समाजसेवी
नवलगढ़ निवासी- राऊलकेला प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९८३००३१५९६

परिवार गायत्री परिवार से जुड़ा है। ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका काफी अच्छी हैं। राजस्थानी प्रवासियों को उनको संस्कृति, सभ्यता से जोड़कर सामाजिक प्रेम एवं भाईचारा बनाए रखने का बहुत अच्छा कार्य कर रही है। राजस्थानी भाषा को प्रांतीय भाषा का सम्मान मिलना हमारे लिए गर्व की बात है, उसी तरह ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक मान्यता अवश्य मिलना चाहिए, ‘हिंदी’ के माध्यम से ही देश का सम्पूर्ण विकास संभव है।

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