दिसंबर समीक्षा

हेलो! मेरा राजस्थान
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सुधीर सांखला

अध्यक्ष, आमेट मित्र मंडल, मुंबई
व्यवसायी व समाजसेवी
भ्रमणध्वनि: ९८६९१४२८२५

मूलत: ‘आमेट’ के निवासी सुधीर सांखला १९९२ से मुंबई के प्रवासी हैं, आपका जन्म मुंबई व सम्पूर्ण शिक्षा ‘आमेट’ में सम्पन्न हुई, शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात आप मुंबई आये व अपने बड़े भाई के साथ ज्वेलरी के कारोबार से जुड़े व २००६ से आपने अपना ज्वेलरी का व्यवसाय प्रारंभ किया। आप सामाजिक कार्यों में सदैव सक्रिय भागीदारी निभाते रहते हैं। वर्तमान में आप मुंबई के आमेट मित्र मंडल में अध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं, पूर्व में इस संस्था में कोषाध्यक्ष भी रहे। मुंबई तेरापंथ समाज कोलीवाडा में उपाध्यक्ष के पद पर सेवारत हैं, साथ ही अन्य संस्थाओं से भी जुड़े हुए  हैं।अपनी पैतृक भूमि ‘आमेट’ के सन्दर्भ में आपका कहना है कि पूर्व के ‘आमेट’ व अभी के आमेट में काफी परिवर्तन आया है, बड़ी तेजी से विकास हुआ है जहां पहले कच्ची सड़कें थी आज यहां पक्की सड़कें बन चुकी है। आर्थिक दृष्टि से भी यहां के लोग समृद्ध हुए हैं, मुख्यत: ज्वेलरी का व्यवसाय अधिक है, यहां स्थित लक्ष्मीबाजार में ३०-४० दुकानें स्वर्णकारों की ही है। 

 

पूर्व में यहां मार्बल व्यवसाय की अधिकता थी लोगों कोरोजगार भी उपलब्ध होते थे पर अब इसमें काफी कमी आ गयी हैं दुसरा मुख्य व्यवसाय यहां कपड़ों का है, यहां सभी समाज के लोग आपस में मिल-जुलकर रहते हैं, मुख्यत: जैन समाज के १००० के लगभग परिवार है ब्राम्हण, अग्रवाल जैसे अन्य सम्प्रदाय के लोग भी निवास करते है। तेरापंथ सभा भवन, महावीर भवन, पाश्र्वनाथ जैन मंदिर आदि हैं, पर्यटन की दृष्टि से वेवर महादेव का मंदिर व शिवनाल यहां मुख्य आकर्षण का है, जिसका ऐतिहासिक महत्व है व लोगों की बड़ी श्रद्धा है, यहां सरकारी सभी सुविधाएं उपलब्ध है। आमेट मित्र मंडल मुंबई द्वारा आमेट में विभिन्न सहायता प्रदान की जाती है।‘हिंदी’ सभी राज्यों व भाषाओं को आपस में जोड़ती है, ‘हिंदी’ के द्वारा ही भारत के किसी भी कोने में सम्पर्क स्थापित करने में आसानी होती है, अत: ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक सम्मान मिलना ही चाहिए, यही हमारे भारत वर्ष की पहचान है।

 

महावीर जी का जन्म १९७६ में व शिक्षा राजस्थान के ‘आमेट’ में सम्पन्न हुई है। शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात ३ वर्ष तक आपने प्ररिक्षण प्राप्त किया, तत्पश्चात १९९६ से आपने अपना स्वयं का ज्वेलरी का व्यवसाय प्रारंभ किया। व्यवसाय के साथ आप सामाजिक क्षेत्र में भी गहन रुचि रखते हैं। आमेट मित्र मंडल मुंबई में कोषाध्यक्ष के पद पर सेवारत हैं, श्रमण संघ की संस्था में कोषाध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं, मेवाड नवयुवक मंडल मुंबई में सलाहकार के पद पर है, साथ ही आप अन्य कई संस्थाओं से भी जुड़े हैं।  अपनी जन्मभूमि के बारे बताते हुए कहते हैं, ‘आमेट’ में मेरे पिताजी का कपड़ों का व्यवसाय रहा, वर्ष भर में आमेट में ४-५ जाना होता है, पहले के आमेट व अभी में काफी अंतर आ गया है। पूर्व में सभी मोहल्लों में लोग दिखायी देते थे पर आज पूरा मोहल्ला खाली हो गया हैं, घरों में ताले लगे हैं, लोग व्यवसाय के उद्देश्य अन्य स्थानों पर चले गए हैं। ब्राम्हण, माहेश्वरी आदि समाज के लोग निवास करते है, 

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महावीर चंडालिया

कोषाध्यक्ष, आमेट मित्र मंडल, मुंबई
व्यवसायी व समाजसेवी
भ्रमणध्वनि: ९९६९६३९६५३

भौगोलिक दृष्टि से यहां वर्षा कम होती है जिसका मुख्य कारण यहां का मार्बल व्यवसाय है। पीने के पानी में कमी हो गयी है, अब नाथद्वारा के पास स्थित डैम से पानी आता है, थाड़ी समस्याओं के बावजुद भी यहां का अपना इतिहास रहा है, पर्यटन की दृष्टि से वेवर महादेव, शिवनाल, कोटेश्वरी, महादेव मंदिर आदि दर्शनीय स्थल हैं, सड़कों की सुविधाएं व्यवस्थित नहीं जिस पर अभी कार्य चल रहा है, ऐसा है हमारा आमेट। अपनी भाषा से जुड़ाव महसूस होता है, हिंदी व अंग्रेजी भी आज की आवश्यकता है, अत: ज्ञान जरुरी है, जहां तक राष्ट्रभाषा का प्रश्न है तो वह मात्र ‘हिंदी’ ही बन सकती, अत: हिंदी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार अवश्य मिलना चाहिए।

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प्रमोद बाफना

व्यवसायी व समाजसेवी
आमेट निवासी-मुंबई प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९९६९१२५७८१

मूलत: राजस्थान के आमेट के निवासी हैं प्रमोद बाफना जो २० वर्षों से मुंबई के प्रवासी हैं, यहाँ इलेक्ट्रीक के कारोबार से जुड़े है। आपका जन्म आमेट में हुआ व बी.कॉम. की शिक्षा उदयपुर से प्राप्त की, मुंबई स्थित कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े है। आमेट मित्र मंडल मुंबई में आप सदस्य के रूप में जुड़े है। मेवाड मित्र मंडल मुंबई, स्थानकवासी जैन श्रावक संघ में व्यवस्थापक मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। मेवाड़ मित्र मंडल आदि संस्थाओं से जुड़कर सामाजिक कार्य करते रहते हैं। ‘आमेट’ की खुबियों को बताते हुए कहते हैं कि आमेट एक शांतिप्रिय क्षेत्र है यहां सभी समाज हिंदु, मुस्लिम, जैन आदि बड़े प्रेम भाव से रहते हैं, आपस में कोई भेद-भाव नहीं जातिवाद भी नहीं, आज तक कभी कोई समाज में झगड़ा विशेष नहीं हुआ है।

यहां का विकास भी तेजी से हुआ है। बाजार में दुकानों की संख्या बढी है, यहां पर व्यवसायों की अधिकता के कारण लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हो जाते है। यहां मार्बल, कपड़े व ज्वेलरी के व्यवसाय की अधिकता है। जयसिंह श्याम मंदिर, वेवर महोदव आदि दर्शनीय है। ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान मिलना ही चाहिए। ‘हिंदी’ के माध्यम से ही देश का सम्पूर्ण विकास संभव है ‘हिंदी’ से देश का प्रत्येक नागरिक जुड़ा हुआ है। ‘हिंदी’ हमारी पहचान है अत: हिंदी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार अवश्य प्राप्त होना चाहिए।

राजस्थान का आमेट वीर पत्ता की भूमि है, मुझे गर्व है कि यह मेरी जन्मभूमि है, मेरी सम्पूर्ण शिक्षा भी आमेट में सम्पन्न हुई है, लगभग १२ वर्षों से सूरत का प्रवासी हूँ यहां होम अप्लायंस के व्यवसाय में कार्यरत हूँ। सामाजिक संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी निभाता हूँ। आमेट मित्र मंडल सदस्य में मंत्री के पद पर सेवारत हूँ। सूरत जैन युथ क्लब में सदस्य के रूप में जुड़ा हूँ। क्लब के सदस्य चातुर्मास के प्रत्येक रविवार को जरूरत मंदो को सेवाएं करते हैं। आमेट मित्र मंडल सूरत द्वारा भी कई सामाजिक सेवाएं की जाती है। आमेट ग्राम पंचायत के विद्यालय में जरूरतमंद विद्यार्थियों को नोट बुक, कपड़े व अन्य जरूरत की वस्तुओं का वितरण करते रहते हैं। वक्त के साथ आमेट में बहुत परिवर्तन हुए हैं, आमेट में कोई भी रूढ़िवादी प्रथा नहीं है, यहां के सभी जैन समाज व अन्य समाज के लोग आपस में मिल-जुलकर रहते हैं व जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के सहयोग से पिछे नहीं हटते, आमेट में व्यापार की कोई कमी नहीं है, पहले जहां कपड़ों के व्यापार की अधिकता थी, आज वहीं मार्बल के व्यवसाय की अधिकता है।

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विनोद बापना

मंत्री, आमेट मित्र मंडल, सूरत
आमेट निवासी-सूरत प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९८२५१६०२२२

सरकार द्वारा सभी सुविधाएं प्रदान की गई हैं पर चिकित्सा व शिक्षा की व्यवस्था व सुविधा सही नहीं है। आमेट के लोग पूरे भारत में व्यापार के लिए बसे तो हैं ही साथ ही विदेशों में भी बसे हैं व आमेट का नाम रौशन कर रहे हैं, आमेट के निवासी चाहे कहीं भी बसे हों पर आमेट के विकास व उत्थान के लिए व आर्थिक सहायता प्रदान करने में पीछे नहीं रहते। आमेट के लक्ष्मीबाजार, राजमहल, वेवर महादेव शिवनाल, जयसिंह श्याम जी का मंदिर, रामचौक, आदि कई दर्शनिय स्थल है जो आमेट की शोभा बढ़ाते हैं। हर व्यक्ति को अपनी मातृभाषा से लगाव होता है व अपनी भाषा वालों से अपनी भाषा में ही बात करना पसंद करता है पर जहां राष्ट्रभाषा का प्रश्न है तो पूरे भारत में एक ही भाषा अपनायी व बोली जानी चाहिए ‘हिंदी’ ही एक मात्र वह भाषा है जो पूरे राष्ट्र में समान रूप से बोली व समझी जाती है, अत: ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान जरूर मिलना चाहिए। आज हिंदी को प्रचार-प्रसार बढ़ रहा है लोगों को समझ भी आ रही है कि बिना ‘हिंदी’ के आर्थिक सुधार नहीं लाया जा सकता।

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डॉ. प्रकाश सांखला

ऑरथोपेडिक सर्जन
आमेट निवासी-मुंबई प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९८२००२८५५७

मुंबई में जन्में पले-बढ़े व शिक्षा प्राप्त डॉ. प्रकाश मूलत: राजस्थान के आमेट के निवासी हैं, जहां से कई वर्ष पूर्व आपका परिवार रोजगार के उद्देश्य से मुंबई आकर बस गया, मुंबई के चेंबूर इलाके में आप अपने अन्य डॉक्टर मित्र के साथ मिलकर ‘स्वस्तिक हॉ स्पिटल अ‍ॅण्ड रिसर्च सेंटर’ का संचालन कर रहे हैं, आप १९९८ से ऑरथोपेडिक सर्जन के रूप में सेवारत हैं। २०१६ व २०१७ में इंडियन मेडिकल असोशियेशन, चेम्बुर में अध्यक्ष पद पर कार्यरत रहे, आप अपनी कार्य के प्रति काफी सजग हैं। अपनी मेहनत व लगन के बल पर ही आज ऑरथोपेडिक सर्जनों में आपका नाम विशेष उल्लेखनीय है। 

अपनी शिक्षा व व्यस्तताओं के कारण आपका आमेठ जाना नहीं हो पाता है, इसके बावजुद अपनी पैतृक भूमि से आपको लगाव है। आमेठ मित्र मंडल, मुंबई में आप सदस्य के रूप में जुड़े हैं व इनके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों में आप सदा आर्थिक सहयोग प्रदान करते रहते हैं।

 

‘आमेट’ मेरी जन्म भूमि है, ‘आमेट’ का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है, यहां का लक्ष्मीबाजार मुख्य बाजार है, यहां सभी वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, इसलिए आस-पास के सभी गांव वाले यहीं मार्किट करने आते है।  नेहरु मार्किट में ४०-५० दुकानों की संरचना इस प्रकार है कि एक छोर से दूसरे छोर तक आसानी से सब दिखायी देती है। तेरापंथ सभा भवन भी है। ‘आमेट’ आने के लिए ‘चारभुजा रोड’ रेलवे स्टेशन उतरना पड़ता है, यहां के प्रसिद्ध जयसिंग श्याम जी का मंदिर, पाश्र्वनाथ जैन मंदिर है। यहां की गौशाला जयसिंग मंदिर द्वारा संचालित होता है। वेवर महादेव मंदिर ऐतिहासिक है जो चन्द्रभागा नदी के तट पर स्थित है। ‘आमेट’ से तीन किलो मिटर स्थित शिवनाल है जो पहाड़ों पर स्थित है, लावा सरदार गढ़ किला, मनोहर सागर तालाब आदि ‘आमेट’ की विशेषता है। आबादी लगभग २० हजार से अधिक है, जैन समाज के अतिरिक्त अन्य समाज के लोगों की संख्या बड़े प्रमाण में है, शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी प्रगति हुई है।

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रमेश जैन

व्यवसायी व समाजसेवी
आमेट निवासी-मुंबई प्रवासी
भ्रमणध्वनि: ९८३३६७४९४८

मैं पिछले ४० वर्षों से मुंबई का प्रवासी हूँ, मूलत: आमेट का निवासी हूँ मेरा जन्म नाथद्वारा के पास स्थित मनमाना गांव में हुआ व स्नातक की शिक्षा नाथद्वारा से सम्पन्न की, शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात २-३ वर्ष भारतीय सेना में कार्यरत रहा, पर पारिवारिक दबाव के चलते मुझे यह क्षेत्र छोड़ना पड़ा, इसके पश्चात मुंबई प्रवासी हुआ व ज्वेलरी के व्यवसाय से जुड़ा हूँ। आमेट मित्र मंडल मुंबई में सदस्य के रूप में जुड़ा हूँ, तेरापंथ समाज, भारत जैन महामंडल व जीतो आदि संस्था से जुड़ा हुआ हूँ। हर किसी को अपनी मातृभाषा से लगाव होता है, मातृभाषा में जो सहजता होती है वह अन्य भाषा में नहीं होता, हिंदी सभी भाषाओं को आपस में जोड़ती है। ‘हिंदी’ ही एक मात्र भाषा है जो राष्ट्रभाषा बन सकती है, ये पूरे भारत भर में समान रूप से बोली व समझी जाती है, अत: हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान अवश्य ही मिलना चाहिए।

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रोशनलाल तेली

आयटी सेल जिला सह संयोजक
आमेट निवासी
भ्रमणध्वनि: ९९२९१३२५४२

आमेट के निवासी रोशनलाल तेली राजनीति के क्षेत्र में २००८ से सक्रिय भूमिका निभा रहे है, आपका जन्म व शिक्षा आमेट में ही सम्पन्न हुई। आपकी हमेशा से ही राजनीति में रूचि रही इसीलिए आपने राजनीति को ही अपना कार्यक्षेत्र चुना व २००८ में आप कांग्रेस पार्टी से जुड़े व वर्तमान में आप आमेट में कांग्रेस के आइटी सेल के जिला सह संयोजक के रूप में कार्यरत है। आमेट के बारे बताते हैं कि पूरे भारत में आमेट मार्बल नगरी के रूप में जाना जाता है, यहीं से भारत भर में मार्बल निर्यात किया जाता है। मार्बल के बड़े-बड़े उद्योगपति आमेट के ही हैं, कपड़ों के व्यवसाय के लिए भी आमेट जाना जाता है। आमेट की सामाजिक स्थिति बहुत अच्छी है, यहां सभी समाज के लोगों का आपस में
बहुत अच्छे संबंध है। ‘आमेट’ में जयसिंह श्याम मंदिर, वेवर महादेव, शिवनाल, गौशाला आदि है। ऐतिहासिक पुरूष वीर पत्ता भी आमेट के ही निवासी थे। आमेट में कई महान विभूतियों का जन्म हुआ है जिन्होंने आमेट का नाम पूरे विश्व में रौशन किया है।

आज ‘हिंदी’ का प्रचार-प्रसार भारत में ही नहीं पूरे विश्व में हो रहा है पर अपने ही देश में ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान नहीं मिल पाना दु:ख का विषय है, आज ‘हिंदी’ से सभी जुड़े हैं, ‘हिंदी’ के माध्यम से प्रत्येक कार्य आसानी से किया जा सकता है अत: ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का सम्मान अवश्य मिलना चाहिए।

मूलत: राजस्थान स्थित आमेट के मूल निवासी है, आपका जन्म व शिक्षा आमेट में ही सम्पन्न हुई, व्यवसाय के उद्देश्य से आप १९६२ से मुंबई के प्रवासी बनें, मुंबई में आपका ज्वेलरी का व्यवसाय है। सामाजिक कार्यों में आप सहभागी रहते हैं, आमेट मित्र मंडल में सदस्य के रूप में जुड़े है। आमेट के बारे में कहते हैं कि आमेट बहुत ही सुंदर स्थान है, आमेट के आस-पास पहाड़, नदी स्थित है जो आमेट को और सुंदर बनाते हैं, आमेट में विकास भी समय के अनुरूप होता रहा है, यहां सामाजिक स्थिति भी बहुत अच्छी है, लोगों का आपस में मेल-जोल बहुत है। विवदों को आपस में बैठकर सुलझाते हैं, यहां स्थित शिवनाल जो पहाड़ों पर स्थित है एक एैतिहासिक स्थल है, वेवर महादेव मंदिर, जयसिंग श्याम मंदिर ‘आमेट’ की विशेषता बढ़ाते हैं, यहां जैन समाज का एक पाश्र्वनाथ जैन मंदिर है जो सभी की आस्था का वेंâद्र है, चन्द्रभाग नदी जो आमेट की शोभा बढ़ाती थी, अब इसका रूप कुछ विकृत हो गया है।

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रतनलाल हिरण

व्यवसायी व समाजसेवी
आमेट प्रवासी-मुंबई निवासी
भ्रमणध्वनि: ९३२३१०१६५०

आर्थिक दृष्टि से भी आमेट सम्पन्न है, यहां के लोग भारत के विभिन्न स्थानों पर निवासित है, आमेट का नाम रौशन कर रहे हैं। ‘हिंदी’ भाषा अपनी भाषा है, वर्तमान में ‘हिंदी’ का प्रचार-प्रसार हो रहा है, आज ‘हिंदी’ बाजार की मुख्य भाषा के रूप में जानी जाती है व लोगों से अधिक जुड़ी है, अत: हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान प्राप्त होना आवश्यक है।

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