।। श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये ।।

श्री हनुमान जयंती-चैत्र सुदि पुर्णीमा २०१७ कलियुग वर्ष ५१८१ शुकवार १९ अप्रैल २०१९
मारवाड़ी सम्मेलन ने लिया निर्णय पाकिस्तान से कोई भी व्यापार ना किया जाये
-संतोष सराफ, अध्यक्ष अ. भा. मारवाड़ी सम्मेलन
शमशाबाद एयरपोर्ट रोड स्थित मणियार होम्स के रघुनाथमल गोयल सभागृह में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन की अखिल भारतीय समिति की बैठक में दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ करते हुए अध्यक्ष संतोष सराफ, उपाध्यक्ष गोवर्धनप्रसाद गारोडिया, विवेक गुप्ता, पवनकुमार गोयन्का, महामंत्री गोपाल झुनझुनवाला, प्रादेशिक सम्मेलन के अध्यक्ष रमेशकुमार बंग, महामंत्री रामपाल अट्टल, सभी अतिथियों का प्रादेशिक सम्मेलन की ओर से सम्मान करते हुए रमेशकुमार बंग शमशाबाद एयरपोर्ट रोड स्थित मणियार होम्स के रघुनाथमल गोयल सभागृह में
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हैदराबाद: जब तक पाकिस्तान युद्ध विराम का उल्लंघन करता रहेगा तथा आतंकियों को पनाह देता रहेगा, मारवाड़ी समाज का कोई भी व्यवसायी पाकिस्तान से किसी तरह का व्यापारिक संबंध ना रखे, शमशाबाद स्थित मणियार होम्स के रघुनाथमल गोयल सभागृह में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन की अखिल भारतीय समिति की बैठक में अध्यक्ष संतोष सराफ द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। तेलंगाना प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के आतिथ्य में आयोजित इस बैठक में देश के विभिन्न प्रदेशों से लगभग ५० प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
अखिल भारतीय समिति की बैठक में पधारे प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए प्रदेश अध्यक्ष रमेशकुमार बंग ने कहा कि किसी भी संगठन या संस्था का महत्व उसकी सुदृढता तथा दायित्व निर्वहन के समर्पित प्रयास, कार्यकर्ताओं की दृढ इच्छा शक्ति में झलकते है। विश्व के कोने-कोने में बसे मारवाड़ी समाज की सादगी, सांस्कृतिक मान्यतायें, परोपकारी प्रवृत्ति, त्याग की उदात्त भावना, राष्ट्रीयता व सृजनात्मक प्रवृत्ति को सराहा गया है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के परिप्रेक्ष्य में विविधताओं से भरे मारवाड़ी समाज की सांस्कृतिक चेतना, व्यावसायिक सिद्ध हस्तता को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर अपितु वैश्विक पटल पर भी नवनिर्माण के साथ सर्वांगीण विकास का मूलाधार कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। बैठक में महामंत्री श्रीगोपाल झुनझुनवाला, उत्कल प्रान्तीय सभा के अध्यक्ष ओमप्रकाश जालान, दिल्ली प्रान्तीय सम्मेलन के अध्यक्ष राजकुमार मिश्र आदि ने भी अपने विचार रखे। सदस्यों ने संविधान की कुछ धाराओं में सर्वानुमति से संशोधन पास किए संशोधित विधान की धारा के अनुसार आजीवन सदस्यता शुल्क को बढा कर रू. ५०००.०० किया गया, पारित सुझाव के अनुसार आजीवन सदस्यता की राशि १ जुलाई से प्रभावी रहेगी।
सदस्यता समिति के संयोजक बसंत मित्तल ने बताया कि अगले कुछ दिनों में शीघ्र ही आंध्र प्रदेश में भी प्रान्तीय सम्मेलन की शाखा का शुभारंभ किया गया।
तेलंगाना प्रादेशिक सभा के महामंत्री रामपाल अट्टल ने आये हुए अतिथियों का परिचय दिया तथा सभी के साथ पुलवामा के शहीद जवानों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मौन श्रद्धांजली अर्पित की।

३० मार्च १९४९ का सूर्योदय लेकर आया एक नया सवेरा

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राजस्थान यानि कि राजपूतों का स्थान, भारत के विकास में राजस्थान और राजस्थानियों का अमूल्य योगदान रहा है, चाहे वह उद्योग धन्धे के क्षेत्र में हो साहित्य व सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में, जाहिर तौर पर राजस्थान की कुछ खूबियाँ है, अपनी इन्हीं खूबियों के कारण ही हवेलियों का यह प्रदेश पुरे दुनियाँ में आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।
‘राजस्थान दिवस’ ३० मार्च के उपलक्ष्य में राजस्थान की इन्ही खूबियों पर एक बार फिर से प्रकाश डालने की कोशिश में ’मेरा राजस्थान’ पत्रिका परिवार द्वारा प्रस्तुत राजस्थान परम्पराओं का संक्षिप्त विवरण, आप सब के सामने…
३० मार्च १९४९ का सूर्योदय लेकर आया एक नया सवेरा:
जब भारत के मानचित्र पर राजस्थान राज्य का उदय हुआ, भारत की स्वतंत्रता के बाद देशी राज्यों के विलय और उनकी व्यवस्था करने की समस्या समाधान चाहती थी। ५ जुलाई १९४७ को सरदार वल्लभ भाई पटेल ने रियासती विभाग का कार्यभार संभाला।
राजाओं के प्रति उनकी सदाशयता मित्रभाव तथा सम्मानजनक व्यवहार ने राजाओं को प्रभावित किया। सरदार पटेल ने अपने विश्वस्त साथियों के सहयोग व परामर्श से सर्वप्रथम छोटे राज्यों की ओर ध्यान दिया, उन्होंने अलवर, भरतपुर, धौलपुर व करौली राज्यों को मिलाकर ‘मत्स्य संघ’ के नाम से पहला राज्य गठित किया, जिसका उद्घाटन १८ मार्च १९४८ को केंद्रीय खान मंत्री एन.वी. गाडगिल ने किया। महाराजा धौलपुर उदयभान सिंह राजप्रमुख तथा अलवर के शोभाराम प्रधानमंत्री बनाए गए। एकीकरण के दूसरे चरण में २५ मार्च १९४८ को कोटा में दूसरे संघ का निर्माण हुआ।
उदयपुर महाराणा ने भी संघ में शामिल होने पर सहमति दे दी। १८ अप्रैल १९४८ को उदयपुर में संयुक्त राजस्थान संघ का उद्घाटन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरु ने किया, इस संघ में उदयपुर के साथ कोटा, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, शाहपुरा व टोंक मिलाए गए, इस संघ के राजप्रमुख मेवाड़ के महाराणा भोपालसिंह तथा प्रधानमंत्री माणिक्य लाल वर्मा बनाए गए।
१९ जुलाई १९४८ को लावा चीफ-शिप जयपुर राज्य में तथा कुशलगढ़ चीफ-शिप बांसवाड़ा राज्य का अंग होने से राजस्थान में विलीन कर दिया गया, इस समय तक तीन बड़ी रियासतों-जयपुर, जोधपुर व बीकानेर के अलावा लगभग सभी राज्य एकता की डोर में बांध लिये गए थे। जून १९४८ में इन सभी रियासतों को कांग्रेस ने संगठित होकर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस का गठन किया, जिसके प्रथम अध्यक्ष गोकुलभाई भट्ट निर्वाचित हुए। १९४८ में जयपुर में हुए अ. भा. कांग्रेस के अधिवेशन में सरदार पटेल ने जयपुर, जोधपुर व बीकानेर के नेताओं तथा अन्य नेताओं से वृहद राजस्थान के निर्माण के संबंध में वार्ता कर उन्हें विश्वास में लिया। राजाओं से भी अलग-अलग स्तर पर वार्ता कर, उन्हें तैयार किया गया। केंद्र शासित जैसलमेर को भी राजस्थान में विलय का निर्णय कर लिया गया। उदयपुर के संघ में शामिल हो जाने से जयपुर, जोधपुर और बीकानेर के विलय का मार्ग प्रशस्त हो गया, इन रियासतों के विलय के साथ उदयपुर के महाराणा को उनके सम्मान के अनुकूल महाराज प्रमुख तथा जयपुर महाराजा को राजप्रमुख तथा कोटा महाराज को उप राजप्रमुख बनाया गया। राजाओं के प्रिवीयर्स भी राज्य की आय के अनुरुप निश्चित किए गए।
राजाओं के साथ उनकी निजी संपत्ति के निर्धारण के साथ संधि की गई। ३० मार्च १९४९ (नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा २००६) को रेवती नक्षत्र, इन्द्र योग में प्रात: १० बज कर ४० मिनट पर भारत के तत्कालीन उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जयपुर के राजप्रसाद के ऐतिहासिक दरबारे-आम में वृहद राजस्थान का उद्घाटन किया तथा राजप्रमुख पद के लिए महाराजा जयपुर सवाई मानसिंह को शपथ दिलाई। राजप्रमुख ने कोटा के महाराव को उप राजप्रमुख पद तथा पं. हीरालाल शास्त्री को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई।

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कुरजा ए म्हारा भंवर मिला दीजे रे..
हर बार सर्दियां लगते ही प्रवासी पक्षी ‘कुरजा’ जब प्रदेश के धोरों पर आती हैं तो विरह वेदना झेल रही स्त्री यही गीत गाती है। परदेश कमाने गए इन पूतों ने आज अपनी मेहनत और उद्यमशीलता से देश-दुनियाँ में यह साबित किया है कि प्रकृति जहां दिल खोल कर नहीं बसती हो वहां के वाशिंदों को भी उद्यमशीलता और मेहनत संपन्न बना सकती है, इसीलिए चुरु से उठे एक शख्स में आज ‘लक्ष्मी माँ ने निवास’ कर लिया, मारवाड़ी मित्तल ने दुनियाँ के अमीरों में जगह बनाई। जमनालाल बजाज जी (स्व.) को गांधी जी अपना पांचवां बेटा मानते थे, आज ‘बजाज’ दुपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों में दुनिया में अव्वल है। बिड़ला, बांगड़, डालमिया, मोदी, धूत आदि-आदि कई ऐसे नाम है जो दुनियाँ में किसी परिचय के मोहताज नहीं।

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मारवाड़ी उद्योगपतियों को लेकर अगर आप सोचते हैं कि वे गुवाहाटी, चेन्नई, बैंगलोर, हैदराबाद, नेपाल या महाराष्ट्र तक देश की चारों दिशाओं में फैले हैं तो आपको गलतफहमी होगी, आज केन्या, दक्षिण अफ्रीका, दुबई, अमेरिका, सिंगापुर और यूरोप आदि-आदि का रुख कीजिए, ‘मारवाड़ी’ व्यवसायी आपको दुनिया के हर कोने में मिलेंगे और हर जगह उन्होंने अपनी उद्यमशीलता से दौलत तो कमाई ही है अपनी मृदुभाषिता और व्यवहार से दोस्त भी कमाए हैं। ‘सेबी’ के पूर्व अध्यक्ष के अनुसार देश का लगभग एक तिहाई पैसा इन मारवाड़ी उद्यमियों की जेब में है और वह दिन दूर नहीं जब दुनिया की दौलत का बड़ा हिस्सा लगभग ७०% भारत की इकोनोमी इन्हीं के द्वारा संचालित होगी इसलिए मैं कहता हूँ कि हम राजस्थानियों से की अपनी ताकत पहचाननी होगी और मिलकर भारत को सर्वश्रेष्ट उद्योग स्थल बनाना होगा तभी हम सर्वश्रेष्ट राजस्थानी कहलाने के योग्य बनेंगें, तब राजस्थान को ‘धनीस्तान’ के खिताब से नवाजा जायेगा।

बाहर से आने वाले सैलानियों के लिए भारत आने का सबसे बड़ा आकर्षण राजस्थान ही होता है, यही कारण है कि भारत आने वाला हर तीसरा विदेशी पर्यटक राजस्थान प्रदेश का रुख जरुर करता है।

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केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश...
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२०१५ को भारत में आने वाले विदेशी सैलानियों में से हरेक चौथा सैलानी जो भी राजस्थान आया, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इंग्लैंड में बीते दिनों आयोजित विश्व पर्यटन मेले में ज्यादातर सैलानियों ने ‘ताजमहल’ को राजस्थान में बताया। पर्यटन विभाग के सहायक निर्देशक बताते हैं कि आम हो या खास, हर तरह का सैलानी यहां के रंगों, शिल्प, स्थापत्य, महलों, हवेलियों, धोरों, झीलों और जानवरों को देखने जरुर आता है, यहां एक तरफ जहां लिज हर्ले ब्याह रचाती हैं तो दूसरी तरफ पुष्कर के घाट पर अमरीकी बाला कोलीना कालबेलिया नृत्य भी करती हैं।

‘पैलेस ऑन व्हील्स’ के महंगे टिकट एडवांस में बिकते हैं, वहीं लग्जरी ऑन व्हील्स पथ पर चलायमान है’ पुष्कर समारोह, हाथी समारोह, मरु महोत्सव और मारवाड़ समारोह अब दुनिया भर में मशहूर हो चुके हैं। विदेशी पर्यटक हमारे प्रदेश को देख कर चकित रह जाते हैं और यही वजह है कि लगभग ७० देशों के पर्यटक हमारे प्रदेश में आते हैं और इनकी तादाद हर साल बढ़ती ही जा रही है। व्यापक प्रचार और सरकारी संरक्षण के बावजूद राजस्थान को अभी भी व्यापक पर्यटकों की भरभार है।

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हां सा म्हारी रुणक-झुणक पायल बाजे सा…
घूमर की इन मशहूर पंक्तियों में औरतों की प्यारी पायल की आवाज समाहित रहती है तो फिर इस पायल को गढ़ने वाले कारीगरों को कैसे भूलाया जा सकता है। सुन्दर गहने गढ़ने में राजस्थान के जौहरियों का कोई सानी नहीं है, अकेले जयपुर से जहां पिछले बरस १२०० करोड़ रुपयों से भी ज्यादा के गहने निर्यात हुए तो जोधपुर से इतनी ही कीमत का हस्तनिर्मित फर्नीचर विदेश भी गया।
राजस्थान कारीगरों के काम को पूरी दुनिया इज्जत से देखती है, गहने या फर्नीचर ही राजस्थान के कारीगरों को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर नहीं लाते बल्कि यहां की ब्लू पॉटरी, लोक चित्रकला, बंधेज, साफों, जोधपुरी कोट, हस्तशिल्प, चांदी के काम, दरियों-कालीनों, जूतियों, ब्लॉक प्रिंटिंग, कढ़ाई और मीनाकारी की भी दुनिया दीवानी है। ‘दुनियाँ के आधे क्रिकेटर राजस्थानी जोधपुरी मोजड़ी पहन चुके हैं’ ‘बंधेज के विशाल मात्रा में ऑर्डर आते हैं जोधपुर के बंधेज कारीगरों द्वारा निर्मित अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, मध्यपूर्व और चीन तक राजस्थानी बंधेज जाते हैं, अब हमारे ज्यादातर विदेशी ग्राहक फर्नीचर को अपने पूरे मकान की डिजाइन के हिसाब से मंगाते हैं’ जोधपुर के लोहे के फर्नीचर, किशनगढ़ी चित्रों और जयपुरी गहनों के दीवाने दुनिया भर में मौजूद हैं।

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खनिज संपदा
दुबई के एक अमीर जब जोधपुर घूमने आए तो उन्हें पता चला कि उनके महल के बाहर लगा पत्थर राजस्थान से पहुँचा है। राष्ट्रपति भवन हो या संसद, राजस्थानी पत्थरों की बना है। दुनियाँ भर में मशहूर ताजमहल हमारे मकराने के संगमरमर से बना है। तांबा, जस्ता, लाइमस्टोन, सैंडस्टोन, कैमिकल्स वगैरह प्रदेश के सीने से निकल कर, दुनिया भर में जाते हैं। स्कॉटलैंड की तेलखोजी कंपनी कैयर्न एनर्जी ने जैसे ही बाड़मेर में तेल खोजा, लंदन स्टॉक एक्सचेंज में उसके शेयर्स के वारे-न्यारे हो गए। राजस्थान को खनिजों का अजायब घर कहा जाता है। जैसलमेर का लाईमस्टोन दुनिया भर में निर्यात होता है। राजस्थान से केमिकल्स भी ज्यादातर निर्यात होते हैं।
कैयर्न एनर्जी की तेल खोज के बाद, राजस्थान खनिज संपदा के अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर नजर आने लगा है। कैयर्न के बाद वेनेजुएला की कम्पनी भी जैसलमेर में गैस की खुदाई में सहयोग कर रही है और प्रदेश के नए कुओं पर दुनिया भर की बड़ी तेल कम्पनियों की नजर गड़ी हुई है।

गायां ने चरावती गोरबंद गूंथियो…
ऊंट के लिए अभी भी ऊन के टुकड़े, कौड़ियां, शीशे और धागे इकाट्ठा कर, मरुस्थल की औरतें गोरबंद गूंथ ही लेती हैं, ‘गोरबंद’ यानी ऊंटों का गहना। ऊंट यानी मरुस्थल का गहना। चांदनी रात में थार के धोरों में कैमल सवारी की इच्छा दुनिया भर के सैलानी रखते हैं, हालांकि ऊंट के रेवड़ और उनकी तादाद दिन ब दिन घटती जा रही है मगर यही ऊंट प्रदेश के सच्चे राजदूत हैं और दुनिया भर में राजस्थान की पहचान भी, पशुधन के लिहाज से उत्तरप्रदेश के बाद राजस्थान देश ही दूसरे स्थान पर है क्योंकि प्रदेश में साढ़े पांच करोड़ से भी ज्यादा मवेशी इस वक्त मौजूद हैं। राजस्थानी गायों के घी में कोलेस्ट्रॉल कम होता है। राजस्थानी भेड़ों की ऊन से बने पट्टू-शॉल-दुशाले दुनिया भर में मशहूर हैं। मालावी नस्ल के घोड़ों की स्वामी भक्ति और क्षमता दुनिया भर में मशहूर है। ‘मारवाड़ी घोड़े को अगर प्यार मिल जाए तो वह हवा के भरोसे भी जी लेगा’ अपनी अनूठी ताकत के कारण आज अमेरिका और यूरोप में मारवाड़ी या मालाणी नस्ल के घोड़ों के दीवाने बढ़ते जा रहे हैं।
हर साल पुष्कर, नागौर, झालरापाटन और दिलवाड़ा के पशुमेलों में राज्य के स्पंदन और पशुओं से इस प्रदेश के अनूठे जुड़ाव को महसूस करने वाले लाखों विदेशी पर्यटक आते हैं। विदेशियों में हाथी समारोह और पुष्कर समारोह के लोकप्रिय होने के कारण ही पशुओं से इन पर्यटक मेलों का सीधा जुड़ाव है।

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-बिजय कुमार जैन
भारती शरदजी बागड़ी को वुमन एक्सीलेंस अवार्ड-२०१९ प्रदान
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नागपुर: नेशनल वेब मिडिया भारत का एक अपना न्यूज चैनल है व ह्यूमन राईट्स फोरम के संयुक्त सहयोग से समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, जरूरतमंद महिलाओं, कमजोर अनाथ दिव्यांग बच्चों के बालविकास, बुजुर्गों आदि विभिन्न क्षेत्रों में अच्छा काम करनेवाले समाज सेवीयों को पुरस्कृत करने हेतु कार्यक्रम विदर्भ हिंदी साहित्य संघ हाल में किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन व रुपरेखा नेशनल वेब मिडिया के संचालक महेश पात्रीकर, वरिष्ठ पत्रकार श्यामकांत पात्रीकर, मौहम्मद सलीम, कमल नामपल्लीवार द्वारा किया गया था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महापौर नंदा ताई जिचकर, अनेकों अंतरराष्ट्रीय,राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त समाज सेवक, लेखक शरद गोपीदासजी बागडी, नगरसेविका व सभापति प्रगती अजय पाटिल, धरमपेठ महिला बैंक की चेमरमैन व पुर्व नगरसेविका निलीमा ताई बावणे, भाजपा उत्तर नागपुर अध्यक्ष दिलीप गौर, डाँ. सरिता मिलींद माने(आमदार) थे, सभी अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। महापौर नंदाताई जिचकर ने अपने संबोधन मे कहा कि आज महिलायें समाज के हर क्षेत्र मे आगे बढ़ कर काम कर रही है।
महिलाओं के चेहरों पर खुशी व यश देखकर दूसरी महिलाएं को प्रौत्साहन मिलता है, मुख्य अतिथि शरदजी बागड़ी ने अपना मनोगत व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा इतिहास, पुराण शास्त्र हमें बताता है कि महिलाएं शक्ति का स्वरुप है, असुर संग्राम में कैकयी ने असुरों से युद्ध करते हुए राजा दशरथ के प्राण बचाये थे। कुदरत ने बेटियों व महिलाओं को विशेष गुण दिये है जिसके कारण शादी के बाद बेटियां अपने आपको नये माहौल में ढाल लेती हैं।
कार्यक्रम में महापौर नंदाताई जिचकर, समाज सेवक शरद बागड़ी, नगरसेविका प्रगती पाटिल, निलीमा ताई बावणे, डाँ. सरिता मिलींद माने, भाजपा उत्तर नागपुर अध्यक्ष दिलीप गौर के हाथों सभी महिलाओं को व भारती शरद बागड़ी का सत्कार कर ‘वुमन एक्सीलेंस अवार्ड-२०१९’ से पुरस्कृत किया गया, इसी मौके पर शरद बागड़ी व भारती बागड़ी, जिन्होंने अपना पुरा समय सामाजिक कार्यों में दिया है उनका पुष्पगुच्छ से विशेष सत्कार किया गया।
भारती शरदजी बागड़ी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। बचपन से अपने स्कूल, कालेज में छात्र नेता, कालेज छात्र संघ की अध्यक्षा रहते हुए खेलकूद, डीबेट आदि हर गतिविधियों में भाग लेकर हर क्षेत्र में अग्रणी रही हैं, लायंस, रोटरी आदि सामाजिक संस्थाओं के सदस्य के रूप में महिला सशक्तिकरण, ‘बेटी बचाव-बेटी पढाव’ आदि में सक्रिय योगदान देती रही हैं। भारतीजी के सामाजिक कार्यों के लिये लायंस, रोटरी व माहेश्वरी महिला मंडल, ज्योति महिला मंडल, जीवन सुरक्षा परिषद, महाराष्ट्र आरोग्य केंद्र, माहेश्वरी महिला संगठन आदि में बतौर मुख्य अतिथि रुप में आमंत्रित कर सत्कार व पुरस्कृत किया गया है।
अभी हाल ही में अंतरराष्ट्रीय माहेश्वरी कपल नयी दिल्ली द्वारा महाराष्ट्र से भारती शरद बागडी को नारी शक्ति सम्मान क्रियेटिव लीडर आफ द इयर-२०१९’ से अलंकृत किया गया था। मंच संचालन मौहम्मद सलीम द्वारा किया गया था।

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