अग्रबंधू सेवा समिति मुम्बई द्वारा विज्ञान प्रयोगशाला में उपकरण प्रदान

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अग्रबंधू सेवा समिति मुम्बई के संस्थाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण अग्रवाल (मन्नू सेठ) के सानिध्य एवं महिलाध्यक्षा श्रीमती शोभा बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में आदिवासी गांव के स्कूल ‘प्रभा हीरा गांधी हायस्कूल वड़ोली’, तालुका – जव्हार, जिला – पालघर में विज्ञान प्रयोगशाला में उपयोग हेतु स्कूल के लिए उपकरण प्रदान किये गये।
यह कार्यक्रम मानदमंत्री उदेश अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष गोपालदास गोयल के मार्गदर्शन तथा मंत्री मधु राजेन्द्र अग्रवाल द्वारा की गई व्यवस्था में सम्पन्न हुआ, जिसमें उपाध्यक्ष श्रीमती सुधा अग्रवाल, संयुक्तमंत्री प्रीति गुप्ता, निशा जैन और अन्य सदस्याओं ने भी भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया। ट्रस्टी कानबिहारी अग्रवाल एवं संयुक्तमंत्री अनिल आर. अग्रवाल ने ‘मेरा राजस्थान’ को बतलाया कि संस्था के सदस्यों द्वारा समय-समय पर विविध सेवा कार्य करने के लिये महिला समिति को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है, संस्था के उद्देश्य सभी क्षेत्रों में सेवा प्रकल्पों को सम्पन्न कर जरूरतमंदों को मदद पहुँचाना है।

- कानबिहारी अग्रवाल (ट्रस्टी) ९८२००४०८८९
पंचतीर्थ अम्बिका मंदिर की २३वीं वर्षगांठ धुमधाम से साण्डेराव में सम्पन्न
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साण्डेराव: स्थानीय नगर के श्री पंचतीर्थ अम्बिका मंदिर की २३ वीं वर्षगांठ जुना अखाडे के नागा सन्यासी संत श्री मनसुख हिरापुरी महाराज की पावन निश्रा में हर्षोल्लास व भक्ति भावना के साथ मनाई गई, इस महोत्सव के तहत दिन भर धार्मिक कार्यक्रमों की धुम रही।
अलसुबह मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के शिखर पर ढोल-नगाडोंव गाजा-बाजों के बीच धर्म ध्वजा फहराई गई।


निम्बेश्वर महादेव पर वार्षिक मेला सम्पन्न

प्राचीनतीर्थ स्थल श्री निम्बेश्वर महादेव मंदिर परिसर में लगने वाला वार्षिक मेला वैशाखी पुर्णिमा को भरा गया। मेले को लेकर सभी तैयारियां पुरी की गई थी, मंदिर को आकर्षक फुल मालाओं व रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया
गया था, वहीं परिसर में अस्थाई दुकानें, हाट बाजार, सर्कस, झुले सहित मनोरंजन के साधन लगाये गए थे। निम्बेश्वर ट्रस्ट अध्यक्ष जगतसिंह राणावत के अनुसार वैशाखी पुर्णिमा पर आचार्य पण्डित जब्बरदत्त त्रिवेदी व उनके सहयोगी पंडितों द्वारा विशेष पुजा अर्चना के बाद वार्षिक धर्म ध्वजा फहराई गई। दुर-दराज से पहुंचने वाले दर्शनार्थियों को सुलभ दर्शन के लिए महिलाओं व पुरूषों की लाईन से व्यवस्था की गई थी। गर्मी को देखते हुए जगह-जगह पर शीतल पेयजल व प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई थी, मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर साण्डेराव पुलिस तैनात थी।

जीवन में झुठ नहीं बोले:- हिरापुरी मनुष्य को जीवन में कभी भी झुठ नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि झुठ ही सबसे बड़ा पाप है, झुठ बोलने से अगर किसी की जान बच सकती है तो ऐसे वक्त में झुठ बोलने पर भगवान भी माफ कर देते हैं।
संत श्री ने कहा कि सती द्वारा राम की परीक्षा लेने पर भगवान शिव से एक झुठी बात कही, जिससे शिव आक्रोषित हो गए तथा सती का त्याग कर दिया था, इससे मानव को सीख लेनी चाहिए की सदैव सत्य बोलना चाहिए इससे सद्गति प्राप्त होती है। हरिओम आश्रम रामनगर में नृसिंह जयंती पर आयोजित धर्म सभा में प्रवचन दे रहे थे, संत हिरापुरी ने कहा कि सत्य ही भगवान का एक रूप है, जिससे मनुष्य आसानी से प्राप्त कर सकता है, लेकिन आज के समय में व्यक्ति जगह-जगह पर झुठ बोलता जा रहा है, इसी कारण सत्यरूपी भगवान मनुष्य से दुर होता जा रहा है, इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे।

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महाराणा प्रताप की जयंति धुमधाम से मनाई गई
स्थानीय नगर के भीमनाथ महादेव मंदिर पसिर में मारवाड गोडवाड सेवा समिति के अध्यक्ष जयदेवसिंह राणावत के मार्ग दर्शन में वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप का ४७७ वां जन्मोत्सव समारोह पुर्वक मनाया गया, इस दौरान बड़ी संख्या में क्षत्रिय समाज बंधु उपस्थित थे, क्षत्रिय समाज के युवा नेता प्रभुसिंह राणावत ने महाराणा प्रताप की तस्वीर पर फुलमालाए अर्पण कर दीप प्रज्जवलित के बाद कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जयदेवसिंह राणावत ने राणा प्रताप की जीवन प्रकाश डालते हुए उनके बताये मार्ग पर चलाने का का आव्हान किया।

वैदिक मंत्रोच्चारण व जैकारों के बीच अंबिका मंदिर के शिखर पर चढ़ाई गई धर्म ध्वजा

श्रीमेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज सांडेराव की गायत्री उपासक साध्वी जमनादेवी द्बारा मां अंबिका की विशेष भक्ति के साथ जैकारों के बीच अंबिका मंदिर के शिखर पर चढ़ाई गई धर्म ध्वजा मंदिर बनाने की ललक को लेकर अपनी आजीविका से बचत स्वयं की कमाई से शिखरबंद मंदिर का निर्माण वर्ष १९९० में करवाकर प्राण प्रतिष्ठा के बाद मां की प्रतिमा विराजित की गई थी, इस मंदिर की २४ वीं वर्षगांठ पर संत मनसुख हीरापुरी महाराज के सानिध्य में पंडितों द्बारा वैदिक मंत्रों उच्चारण के बीच गाजों-बाजो के साथ मंदिर के शिखर पर जैकारा लगाते हुए धर्म ध्वजा चढ़ाई गई थी, इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना के बाद महाआरती हुई, जिसमें मेवाड़ा क्षत्रिय कलाल समाज परिवार के सदस्यों सहित सनातन धर्मप्रेमियों ने भाग लिया।
दूर-दराज से पहुंचे लोगों ने मां के देवरे में धोक देकर परिवार के लिए खुशहाली की मन्नते मांगी।

साधना में लीन रहती थी साध्वी जमनादेवी: राणावत
क्षत्रिय राजपूत समाज के प्रभुसिंह राणावत ने कहा कि श्रीमेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज की गायत्री उपासक साध्वी जमनादेवी एक गरीब परिवार से थी, जो १६ वर्ष की उम्र में ही मां अम्बे की भक्ति से लगाव करते हुए धीरे-धीरे अत्यंत कठिन तप-तपस्या करने लगी, पारिवारिक जीवन अपनाते हुए एक अध्यापिका के रूप में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में अध्ययन करवाने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी अपना नाम रोशन किया।
२४ वर्षों तक अन्न का त्याग कर मां की आराधना करते हुए अपनी निजी कमाई से मां का मंदिर निर्माण करवाकर संत-सम्मेलन व प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अपना व्रत खोल अन्न ग्रहण किया था।
मंदिर प्रतिष्ठा के बारह वर्षों बाद साध्वी जी का देवगमन हो जाने पर परिवार जनों ने मंदिर के ठीक सामने अक्षय तृतीया के दिन विधि-विधान से गाजों-बाजो के साथ समाधि दी थी, ‘मेरा राजस्थान’ परिवार इस महान तपस्वी को नमन करता हैं, जिन्होंने तपस्या के दौरान अपना तथा अपने गांव, समाज का नाम रोशन किया।

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