शत्रुओं का विनाश करने वाला पर्व विजयादशमी
यदि अपराह्न में श्रवण नक्षत्र हो तो वह और भी उत्तम माना जाता है, दोनों ही दिन यदि श्रवण नक्षत्र आ जाये तो वह और अधिक श्रेष्ठ होता है। श्रवण नक्षत्र में दशमी का योग ‘विजय-योग’ कहलाता है इसलिए इस दशमी को विजयादशमी भी कहते हैं, इस दिन अपराजिता देवी की भी पूजा की जाती है। विधि-विधान – इस दिन चार काम किये जाते हैं- (१) अपराजिता देवी का पूजन (२) सीमा का लांघना (३) शमी (खेजड़ी) का पूजन (४) देशान्तर जाने का प्रस्थान। पहले अपराजिता का पूजन किया जाता है। तीसरे प्रहर ईशान दिशा में गमन करके पवित्र स्थान पर...





