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भादरा : क्रांतिकारियों की धरती (Bhadra: Land of Revolutionaries)

भादरा : क्रांतिकारियों की धरती (Bhadra: Land of Revolutionaries)

भादरा : क्रांतिकारियों की धरती (Bhadra: Land of Revolutionaries)‘भादरा’ राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में एक ऐतिहासिक कस्बा है। इसका इतिहास वैदिक से लेकर महाभारत काल और मुगलिया सल्तनत से लेकर राजे-रजवाड़ों के दौर तक फैला रहा। अनेक इतिहासकारों ने बार-बार लिखा है कि जांगल प्रदेश के उत्तरी छोर पर बसा ‘भादरा’, भादरा व नोहर का यह इलाका वैदिक काल में सप्तसैंधव क्षेत्र का हिस्सा था, जिसे हिरण्यवती, दृाद्वती, कौािकी, रोहित व सरस्वती जैसी सात नदियां सींचती थीं, इस इलाके में मिलने वाले शंख, सीपियां,करियां व नर कंकाल इस बात का प्रमाण हैं कि किसी समय यहां मानव सभ्यता फली-फूली थी। ज्यादा...

श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन भैरव मंदिर (Shri Nakoda Parshvanath Jain Bhairav ​​Temple)

श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन भैरव मंदिर (Shri Nakoda Parshvanath Jain Bhairav ​​Temple)

श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन भैरव मंदिर (Shri Nakoda Parshvanath Jain Bhairav ​​Temple)बाड़मेर का बालक बोला मैं यहाँ का क्षेत्रवासी भैरव-देव हूँ और आप महान जैन आचार्य श्री हैं, आप इस तीर्थ का विकास करें मैं आपके साथ हूँ परन्तु मुझे भगवान पार्श्वनाथ जी के मंदिर में एक आले (दीवार) में विराजमान करो। श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन भैरव मंदिर, बाड़मेर राजस्थान नाकोड़ा जिला बाड़मेर राजस्थान के बालोतरा रेलवे स्टेशन से १३ किलोमीटर एवं मेवाड़ सिटी से १ कि.मी. दूर पर्वतीय श्रृंखलाओं के मध्य स्थित है। विश्वविख्यात जैन तीर्थ श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ, इस तीर्थ क्षेत्र के आस-पास का इतना प्राकृतिक और मनोहर है...

किराड़ू का अनोखा प्राचीन मंदिर, बाड़मेर(Unique ancient Temple of Kiradu, Barmer)

किराड़ू का अनोखा प्राचीन मंदिर, बाड़मेर(Unique ancient Temple of Kiradu, Barmer)

किराड़ू का अनोखा प्राचीन मंदिर, बाड़मेर(Unique ancient Temple of Kiradu, Barmer) : किराड़ू प्राचीन मंदिर, पांच मंदिरों का एक समूह है जो बाड़मेर से ३९ किलोमीटर की दूरी पर हाथमा गाँव में स्थित है। ११६१ के एक शिलालेख से पता चलता है की हाथमा को पहले ‘किरतकूप’ के नाम से भी जाना जाता था जो पहले पनवारा वंश की राजधानी भी थी। इस मंदिर के विषय में एक किवदंती बड़ी मशहूर है जो इसे और मंदिरों से अलग बनाती है, इस इलाके के स्थानीय लोगों की माने तो एक साधु के शाप ने इस मंदिर को पत्थरों की नगरी में बदल...

वस्त्र नगरी बालोतरा (Textile City Balotra)

वस्त्र नगरी बालोतरा (Textile City Balotra)

वस्त्र नगरी बालोतरा (Textile City Balotra) :‘बालोतरा’ शहर है बाड़मेर जिला, राजस्थान राज्य में भारत का एक भूभाग है। यह जोधपुर से लगभग १०५ किमी दूर है। यह शहर हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग और टेक्सटाइल उद्योग और तिलवाड़ा में एक वार्षिक रेगिस्तान और आदिवासी मेले के लिए जाना जाता है। यह शहर जोधपुर से नियमित अंतराल पर रेल और बसों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। बालोतरा से जालौर (१४ किमी) की ओर असोत्रा गाँव में भारत का तीसरा ब्रह्मा मंदिर है। बालोतरा से बाड़मेर (११ किमी) भगवान श्री विष्णु के प्राचीन मंदिर के गांव में श्री विष्णु का (दुनिया का...

तत्त्वज्ञ श्रावक मुलतान मल बैद का संक्षिप्त परिचय (Brief introduction of the philosopher Multan Mal Baid)

तत्त्वज्ञ श्रावक मुलतान मल बैद का संक्षिप्त परिचय (Brief introduction of the philosopher Multan Mal Baid)

तत्त्वज्ञ श्रावक मुलतान मल बैद का संक्षिप्त परिचय (Brief introduction of the philosopher Multan Mal Baid) : चाड़वास: अद्भुत सादगी, सहनशीलता, समता और सरलता के प्रतीक अध्यात्म पुरुष पूज्य पिताजी श्री मुलतान मल जी बैद का जीवन आज की पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों के लिए अति प्रेरणा दायक है। अक्सर हमें कई विद्वान विभूतियों, तत्त्ववेताओं और अध्यात्मजनों के बारे में जानने व सुनने को मिलता है। कभी-कभी यह प्रश्न उठ सकता है, इतना सारा आध्यात्मिक ज्ञान और तात्त्विक ज्ञान किसलिए, हमारे दैनिक जीवन में इनकी क्या प्रासंगिकता है? इस तरह के प्रश्नों के जवाब हमें पूज्य पिताजी के जीवन से...

चाड़वास के धर्मस्थल (shrines of chadvas)

चाड़वास के धर्मस्थल (shrines of chadvas)

चाड़वास के धर्मस्थल (shrines of chadvas)गांव के पुराने धर्मस्थलों में २२० वर्ष पुराने ठाकुरजी के दो मंदिर हैं। सदियों से महन्त पूजा अर्चना करते आये हैं। एक समय मिश्रजी पूजा करते थे। आज भी पूजा-पाठ चालू है, परन्तु भवनों की हालत ठीक नहीं है। हरीराम बाबा का ७५ वर्ष तथा रामदेवजी का १०० वर्ष पुराना मंदिर है। शिवजी के मन्दिर में महन्त परसरामजी की फोटो लगी हुई एक बगीची है। तोलियासर भैरूंजी व शीतलामाता के मंदिर हैं तथा बाबाजी व मालासी भैरूंजी के थान भी हैं। सार्दुलगढ़ में शनिश्चिरजी के दो मंदिर हैं। वहां पर एक शिवजी का भी मंदिर हैं।...

चाड़वास का अतीत (Past of Chadvas)

चाड़वास का अतीत (Past of Chadvas)

चाड़वास का अतीत (Past of Chadvas)धन चले जाने से राष्ट्र नष्ट नहीं हो सकता, किन्तु इतिहास और प्राचीन गौरव समाप्त हो जाने पर उसका विनाश हो जाता है। अतीत बूढ़ा हो सकता है किन्तु भुलाया नहीं जा सकता, इसी संदर्भ में राजस्थान के एक छोटे से ग्राम ‘चाड़वास’ का लगभग ४५० वर्षो का इतिहास आज अक्षुण्य है, जिसकी संस्कृति, सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक जानकारी प्रस्तुत है: १६वीं शताब्दी से पूर्व चाड़वास का यह क्षेत्र ‘डूंचास’ और ‘चंगाणो’ के नाम से जाना जाता था। सुजानगढ़ की अग्रिम सीमा पर जिसे कि बीदावटी भी कहा जाता था, एक समय मोहिल राजपूत राज करते...

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja)

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja)

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja)दीपावली के अगले दिन यानि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। लोग इस पर्व को अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का पौराणिक महत्व है। इस पर्व में प्रकृति एवं मानव का सीधा संबंध स्थापित होता है। इस पर्व में गोधन यानी गौ माता की पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उतनी ही पवित्र है जितना माँ गंगा का निर्मल जल। आमतौर पर यह पर्व अक्सर दीपावली के अगले दिन ही पड़ता है किन्तु यदा कदा दीपावली और गोवर्धन पूजा के...

सुख समृद्धि का पारिवारिक पर्व – दीपोत्सव (Family Festival of Happiness and Prosperity – Deepotsav)

सुख समृद्धि का पारिवारिक पर्व – दीपोत्सव (Family Festival of Happiness and Prosperity – Deepotsav)

सुख समृद्धि का पारिवारिक पर्व – दीपोत्सव (Family Festival of Happiness and Prosperity – Deepotsav) दीपावली का आलोक प्रदीप्त करे आपका जीवन धन धान्य से भरे लक्ष्मी आपका घर-आँगनसुख समृद्धि सजाये आपके जीवन का कण-कणप्रेम शान्ति की सौरभ से महके आपका उपवन पर्व, उत्सव, त्यौहार आदि मनुष्य के जीवन में मनोरंजन, उल्लास व आमोद-प्रमोद के लिये बहुत अनिवार्य है, इस उद्देश्य से हमारी भारतीय संस्कृति में समय-समय पर पर्व, उत्सव व त्यौहार मनाने की परम्परा है, प्रत्येक त्यौहार के पीछे धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रिय व वैज्ञानिक कारण भी है। आई जगमग दिव्य दीपावली मंगलमय दीप जलाये जा हो घट-घट अन्तर उजियारा निज आनन्द...

धनतेरस की कथा (Story of Dhanteras)

धनतेरस की कथा (Story of Dhanteras)

धनतेरस की कथा (Story of Dhanteras)कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन धनतेरस का पर्व बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। धन्वतरि के अलावा इस दिन लक्ष्मी माँ और धन के देवता कुबेर जी की पूजा जाती है। इस दिन को मनाने के पीछे धन्वंतरि के जन्म लेने के अलावा और भी कहानी प्रचलित है। एक समय भगवान विष्णु मृत्यलोक में विचरण करने के लिए आ रहे थे। उनको आता देख लक्ष्मी जी ने भी उनके साथ चलने का आग्रह किया, तब विष्णु जी ने लक्ष्मी से कहा यदि जो बात मैं तुम्हे कहुँगा अगर वो बात तुम...