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भारत का एक राज्य ‘राजस्थान’ की विशेषता

भारत का एक राज्य ‘राजस्थान’ की विशेषता

राजस्थान यानि कि राजपूतों का स्थान, देश के विकास में राजस्थान और राजस्थानियों का अमूल्य योगदान रहा है। चाहे वह उद्योग धन्धे के क्षेत्र में हो या साहित्य व सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में। जाहिर तौर पर राजस्थान की कुछ खूबियाँ है, अपनी इन्हीं खूबियों के कारण ही हवेलियों का यह प्रदेश पुरे दुनिया में आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। (३० मार्च) राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में राजस्थान की इन्ही खूबियों पर एक बार फिर से प्रकाश डालने की कोशिश में ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका परिवार द्वारा प्रस्तुत राजस्थान परम्पराओं का संक्षिप्त विवरण प्रबुद्ध पाठकों के हाथों में प्रस्तुत: नई किरण......

होलिका दहन

बैकुण्ठ लोक के द्वार खोलता है होलिका दहन वैदिक काल से ही ‘होलिकोत्सव’ को नवत्रिष्टि यज्ञ कहते आए हैं, कालान्तर में प्रहलाद को मारने का प्रयास जब उसके पिता राक्षस सम्राट हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के द्वारा किया तो ‘होलिका’ तो भस्म हो गयी, परन्तु प्रहलाद बच गये, तभी से प्रहलाद के बचने की स्मृति और होलिका (बुराई) के दहन की याद में इसे पर्व के रुप में मनाया जाता है। मनाने की विधि:- ‘होली’ पर्व पूर्णिमा के दिन पड़ता है, अत: नर-नारी सत्यनारायण का व्रत रख कर सूर्यास्त से पूर्व पूजा करके ‘होलिका’ दहन की तैयारी आरम्भ करनी चाहिए,......
पीपाड़ शहर

पीपाड़ शहर

जोधपुर जिले में एक शहर और नगर पालिका है ‘पीपाड़’ जो जोजरी नदी के किनारे बसा हुआ है, इसका नाम संत पीपा जी महाराज के जन्मस्थली होने से इसका नाम ‘पीपाड़’ पड़ा, कुछ लोग यह भी कहते हैं कि इसे पालीवाल ब्राह्मण, जो कि पीपा नाम से मशहूर थे उनके नाम से भी जाना जाता है। जनसंख्या इस शहर की आबादी लगभग ५०००० है, जिसमें ५२³ पुरुष ४८³ महिलाएं हैं, साक्षरता का दर लगभग ५२³ है। शिक्षा शिक्षा के क्षेत्र में ‘पीपाड़’ का नाम सर्वोच्च श्रेणी में आता है, यहां से हर वर्ष चार्टड अकाउंटेंट बनते हैं, जो यहां की जनसंख्या......
मातृभाषा का महत्त्व

मातृभाषा का महत्त्व

इतिहास के प्रकाण्ड पण्डित डॉ. रघुबीर प्रायः फ्रांस जाया करते थे, वे सदा फ्रांस राजवंश के एक परिवार के यहाँ ठहरा करते थे, उस परिवार में एक ग्यारह साल की सुन्दर लड़की भी थी, वह भी डॉ. रघुबीर की खूब सेवा करती थी। एक बार डॉ. रघुबीर को भारत से एक लिफाफा प्राप्त हुआ, बच्ची को उत्सुकता हुई, देखें तो भारत की भाषा व लिपि कैसी है? उसने कहा-‘अंकल! लिफाफा खोलकर पत्र दिखायें। डॉ. रघुबीर ने टालना चाहा, पर बच्ची जिद पर अड़ गयी। डॉ. रघुबीर को पत्र दिखाना पड़ा। पत्र देखते ही बच्ची का मुँह लटक गया। अरे! यह तो......
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