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दिवाली स्नेह मिलन समारोह संपन्न

दिवाली स्नेह मिलन समारोह संपन्न

ठाणे अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की ओर से आयोजित दिवाली स्नेह मिलन में ये शाम मस्तानी संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया, ठाणे समिति के चेयरमैन महेश बंशीधर अग्रवाल ने बताया कि दिवाली के निमित्त समाज को एक छत के नीचे आपस में मिलकर खुशियाँ बाँटने का कार्य किया गया है। ठाणे के डॉ.काशीनाथ घाणेकर हाल में आयोजित इस संगीतमय शाम में मुख्य अतिथि लायन हनुमान अग्रवाल, लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, रमनलाल अग्रवाल, ओमप्रकाश भजनलाल अग्रवाल, रेखा गुप्ता, शिवकांत खेतान, अनूप गुप्ता, सुमन अग्रवाल, सुरेंद्र रुईया, ब्रिजबिहारी मित्तल, दर्शना अग्रवाल, बरखा अग्रवाल व पद्मा अग्रवाल आदि उपस्थित थे, कार्यक्रम को सफल बनाने में...

राजस्थानी फिल्म एसोसिएशन का प्रथम दीपावली स्नेह सम्मेलन

राजस्थानी फिल्म एसोसिएशन का प्रथम दीपावली स्नेह सम्मेलन

मुंबई के बोरीवली स्थित नंदनंदन मुंबई: मुंबई के बोरीवली स्थित नंदनंदन भवन में राजस्थानी फिल्म एसोसिएशन द्वारा प्रथम बार दीपावली स्नेह सम्मेलन का आयोजन किया गया,इस रंगारंग कार्यक्रम में राजस्थानी व हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार, निर्माता-निर्देशक, गायक आदि उपस्थित थे, एसोसिएशन के अध्यक्ष सुश्री नीलू वाघेला, कार्यकारी अध्यक्ष सुधाकर शर्मा, उपाध्यक्ष दीनदयाल मुरारक सचिव अरविंद कुमार, प्रवक्ता सन्नी मंडावरा कोषाध्यक्ष त्रिलोक सिरसरेवाला, संगठन मंत्री अशोक बाफना, मीडिया प्रभारी वैâलाश चौधरी के साथ रवि जैन, ज्योति नारायण पटेल रेणु जैन, गौरी वानखेडे, राजेश मड़लोई, सचिन चौवे, उषा जैन नेहाश्री, श्रवण जैन, माहि शंकर अग्रवाल, नरेश पुरोहित, निर्षेध सोनी कर्मवीर चौधरी, मनिष...

फ्रूट थैरेपी

फ्रूट थैरेपी

यदि हम स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण जागरूक हैं तो निश्चित ही हमारा जीवन शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक अनुकूलित का समवेत व्यक्तित्व बन सकता है। प्राकृतिक चिकित्सा में आहार को ही प्रमुख औषधि माना गया है। सात्विक आहार की नियमितता हमें पूर्ण स्वस्थ बना सकती है। अन्कुरित अनाज, ऋतु अनुकूलित हरी सब्जी, फल आदि का सेवन निश्चित ही स्वास्थ्य को स्वस्थ बनाए रखता है। सन्तुलित भोजन, विश्राम, व्यायाम, योगाभ्यास आदि का दूसरा नाम ही प्राकृतिक चिकित्सा है। वैज्ञानिक अनुसन्धान से ज्ञात हुआ है कि शाकाहारी भोजन के साथ फलों का आहार शरीर को चिरयौवन प्रदान करता है। मांसाहारी और तेज मिर्च मसाले...

स्वाभिभक्त ‘‘पन्ना धरा’’

स्वाभिभक्त ‘‘पन्ना धरा’’

‘‘पन्ना धरा’’ पन्ना धाय आमेट ठिकाने के कमेरी गांव की गुजर्र जाति की महिला थी। रानी कर्मवती ने जौहर से पूर्व कूँवर उदय को पन्ना को सौंपा था। एक दिन मौका पाकर दृष्ट बनवीर ने महाराणा विक्रमादित्य की हत्या कर, सांगा के वंश को निर्मूल करने के उद्देश से उदय की हत्या हेतू नंगी तलवार लेकर पन्ना धाय के पास पहुँचा।परिस्थिति की गंभीरता देख पन्ना धाय ने उदय की हम अपने पुत्र चन्दन को उदय के कपड़े पहनाकर कटवा दिया। मेवाड़ के राजवंश को सुरक्षित रखने के लिए पन्ना ने अपने पुत्र की बलि दे दी। उदयसिंह को पत्तों की टोकरी...

राजस्थानी लोकनाट्य

राजस्थानी लोकनाट्य

राजस्थानी लोकनाट्य लोक अर्थात जन-जन के कंठ पर आसीन साहित्य ही लोकसाहित्य है, इस कंठासीन साहित्य से तात्पर्य मौखिक अथवा वाचिक साहित्य से है, यह साहित्य परम्पराशील होता है और उन लोगों में व्याप्त होता है जो दिखावे से दूर सहज प्रवृत्तियों में संस्कारित होते हुए परिपाटीगत आस्था एवं विश्वासों की डोर में बंधे सामूहिक जीवन के सहयात्री होते हैं,वे समष्टिगत धर्म-कर्म तथा अध्यात्म- अनुष्ठान के जीवनचक्र से बंधी लोकमानसीय प्रज्ञा-मनीषा के महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं, उनका व्यक्ति गौण होता है, वे समग्रत: लोक के वशीभूत होते हैं, यही कारण है कि उनमें प्रचलित गीत, नाट्य, कथा, वार्ता, प्रहसन, नृत्य, शिल्प,...

जयसिंह श्याम गोशाला

जयसिंह श्याम गोशाला

अरावली शृ्रंखला अरावली शृ्रंखला की सुरम्य पहाड़ियों में बसा राजसमंद जिले का आमेट कस्बा मार्बल पत्थर व कपड़ा मण्डी के रूप में विख्यात है। वर्षों पूर्व अम्बाजी नामक पालीवाल ब्राह्मण ने आमेट नगर की नींव रखी। रघन आम्रकुंज की स्मृति में गांव का नाम आमेट पड़ा। क्षत्रिय काल उत्तराद्र्ध में यहां चुण्डावतों का शासन रहा। उनके वंशजों में जग्गा व पत्ता जैसे वीर हुए। उन्होंने मेवाड़ी इतिहास में शौर्य व गौरव के पन्ने जोड़े। राजा जयसिंह की अनूठी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान चारभुजानाथ चमत्कारिक रूप में आमेट की धरा पर अवतरित हुए। जो आज जन-जन की श्रद्धा का केन्द्र बना...

आमेट

आमेट

तेरह सौ वर्ष ब्राह्मण अम्बाजी पालीवाल ने प्रकृति प्रकाप से ग्रस्त पाटन नगरी से पूर्व दिशा में प्रस्थान कर, सघन आम्रकुंज वृक्षों से आच्छादित, जंगली समतल भू-भाग को आवास-स्थल बनाया, जिसको पूर्व में अम्बापुरी बाद में इसी का अपभ्रंश आमेट इस नगर की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठिभूमि है। आमेट नगर पूर्वाद्र्ध में ब्राम्हणों एवं राठौड़ वंशीय शासकों के अधिनस्थ रहा। क्षत्रियकाल के उत्तराद्र्ध में यहां पर चूण्डावतों का आधिपत्य रहा। सोलहवीं शताब्दी में मेवाड़ रियासत के सोलह उमरावों में से आमेट ठिकाने के ‘‘रावसाहब’’ भी एक उमराव थे, जिन्हें रावल कहा जाता है, विद्यमान विशेषताएँ आमेट कस्बा दक्षिणी राजस्थान में जिला...

भारतीय भाषा सम्मान यात्रा

भारतीय भाषा सम्मान यात्रा

आगामी २५ दिसम्बर,२०१८ से ४ जनवरी २०१९ तक भारतीय भाषा सम्मान यात्रा का आयोजन भारतीय भाषा अपनाओ अभियान के संस्थापक अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार एवं सम्पादक बिजय कुमार जैन के नेतृत्व में किया जा रहा है। यह यात्रा ५०० राष्ट्रप्रेमी और हिंदी प्रेमी सेवकों के साथ कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि स्थानों पर होती हुई ४ जनवरी २०१९ को दिल्ली पहुंचेगी तथा हिंदी को देश की राष्ट्रभाषा का संवैधानिक द़र्जा दिलाने के सम्बन्ध में ४ जनवरी २०१९ को अपरान्ह २.३० बजे भारत के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद को तत्सम्बधी ज्ञापन दिया जाएगा। इस निर्धारित यात्रा की पूर्ण...

महाकुंभ

महाकुंभ

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा द्वारा जनवरी २०१९ के पहले सभा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय माहेश्वरी महावुंâभ एवं ग्लोबल एक्सपो के लिए २२ सितंबर को जोधपुर के श्रीराम इंटरनेशनल होटल में आयोजित एक विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में अ.भा.मा. महासभा के महामंत्री श्री संदीप काबरा ने बताया कि ४ से ७ जनवरी २०१९ तक आयोजित ग्लोबल माहेश्वरी एक्सपो अपने आप में अनूठा और अविस्मरणीय होगा, आगे आपने कहां यह एक्सपो समाज के युवाओं की दिशा बदलने वाला सिद्ध होगा एवं युवाओं से आव्हान किया, जो युवा जीवन में कुछ कर गुजरने भी भावना रखते हैं, उन्हें इस माहेश्वरी एक्सपो को जरूर देखना और समझना...

मनोरंजन जगत

मनोरंजन जगत

फिल्में सदा से किसी भी संस्कृति के फैलाव का महत्वपूर्ण माध्यम रही है, लेकिन इस पैमाने पर यदि हम राजस्थानी फिल्मों का मूल्यांकन करें, तो परिणाम चिंताजनक दिखाई देता है। पूरी दुनिया में वीरता, त्याग और बलिदान की धरती के रूप में पहचाने जाने वाले राजस्थान की संस्कृति के फैलाव में राजस्थानी भाषा की फिल्में जो भूमिका अदा कर सकती थी, वो अब तक नहीं कर पायी है। सभी राजस्थानियों के लिए यह गर्व की बात है कि उनके पास विश्व की सबसे गौरवशाली ऐतिहासिक विरासते हैं। स्वर्णाक्षरों में अंकित राजस्थान के लोकेशन और सिचुएशन आज की पीढ़ी के लिए भी...

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