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सूर्यनारायण काबरा, मलाद, सूर्य से सूर्य तक जाएं

सूर्यनारायण काबरा, मलाद, सूर्य से सूर्य तक जाएं

राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ के मूल निवासी सत्यनारायण जी ने ०४ जनवरी १९२६ को माता कृष्णादेवी की पवित्र कोख से जन्म लिया और इसी के साथ एक अविश्वसनीय महागाथा की शुरूआत हुई। मात्र १६ वर्ष की किशोरावस्था में मुंबई आए। मुंबई में उनके पिता बंशीधरजी उस समय के कॉटन सेठ गोविंदराम सेक्सरिया के यहां हैड थे। सन १९४७, जब देश में आजादी का बिगुल बजा और सारा देश खुशी और आनंद से झूम उठा, इसी ऐतिहासिक यादगार वर्ष में आप गीता देवी के साथ परिणय सूत्र में बंध गए। आप दोनों के जीवन की ये खुशियां वक्त बीतने के साथ निरंतर बढ़ती...

शुभ दीपावली​

शुभ दीपावली​

रंगोली भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा और लोक-कला है, अलगअलग प्रदेशों में रंगोली के नाम और उसकी शैली में भिन्नता हो सकती है लेकिन इसके पीछे निहित भावना और संस्कृति में पर्याप्त समानता है, इसकी यही विशेषता इसे विविधता देती है और इसके विभिन्न आयामों को भी प्रदर्शित करती है, सामान्यत: त्योहार, व्रत, पूजा, उत्सव विवाह आदि शुभ अवसरों पर सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता है, इसमें साधारण ज्यामितिक आकार हो सकते हैं या फिर देवी-देवताओं की आकृतियाँ, इनका प्रयोजन सजावट और सुमंगल है, इन्हें प्राय: घर की महिलाएँ बनाती हैं। विभिन्न अवसरों पर बनाई जाने वाली इन पारंपरिक...

लक्ष्मीपूजन व्रत

लक्ष्मीपूजन व्रत

दीपावली अथवा लक्ष्मीपूजन का व्रत और महोत्सव आज लोकमानस में इस प्रकार रम गया है कि उसे उससे पृथक् करने की कल्पना नहीं की जा सकती, इस महोत्सव पर यदि कार्तिक कृष्ण अमावस चित्रा और स्वातियोग में हो तो उसे उत्तम माना गया है,  विधि-विधान : प्रात:काल जल्दी उठकर तेल मालिश अथवा उबटन कर स्नानादि से निवृत्त होकर देवताओं और पितरों को प्रणाम करें और उनकी पूजा करें, इस दिन तीसरे प्रहर में पितरों के लिए ‘श्राद्ध’ करें और तरहतरह के पकवान बनावें तथा उनका भोग लगावें। श्राद्ध कराने वाले ब्राह्मणों को भी भोजन करावें। परिवार के सभी वृद्धजनों और बच्चों...

पांच पर्वों का पर्व

पांच पर्वों का पर्व

भारत एक विशाल देश है, यहां की विभिन्न जातियां, समुदाय, भाषा-भाषी, विभिन्न धर्मों की मान्यता वाला देश है, इनके रीति-रिवाजों में थोड़ी-बहुत विभिन्नतायें तो हो सकती हैं लेकिन मूल रुप से हिन्दु संस्कृति, एक-रुपता इनमें समाविष्ठ है, यहां अनेकता में एकता की मिसाल है, यहां कुछ पर्व ऐसे हैं जो सभी सम्प्रदाय व धर्म के लोग एकसाथ मिलकर मनाते हैं, उनमें दीपावली का पर्व मुख्य है। भारत जगत गुरु था, ईश्वर की इच्छा यह पावन जग संस्कृति उपजे इसमें, नव विश्व प्रेम का बरसे सावन वसुधा बने कुटुम्ब यह, हो सुन्दर आदर्श हमारा गुलदस्ता है देश हमारा, रंग-बिरंगा प्यारा-प्यारा ‘‘असतो मा...

दीपावली के देव कुबेर

दीपावली के देव कुबेर

तिब्बतवासी कुबेर को धन-वैभव का देवता व उत्तर का स्वामी मानते हैं, चीन में कुबेर की गणना आठ लोकपालों में की जाती है, उन्हें धरती, धन व मनुष्यों का रक्षक बताया गया है। बौद्धधर्म में कुबेर को जंजाल बताया गया है। कुबेर दीपावली के देवता होने के साथ-साथ यक्षों, मनुष्यों तथा दैत्यों के भी देवता स्वीकारे गये हैं प्राचीन काल से भारत में दीपावली यक्ष रात्रि के रुप में मनाई जाती है, इस दिन घरों को दीपकों से सजाकर धन के देवता व रक्षक कुबेर की पूजा बहुतायत में की जाती थी, उस समय उन्हें दीपावली के आदि देवता के रुप...

अमेरिका में भारत गौरव सम्मान से अलंकृत

अमेरिका में भारत गौरव सम्मान से अलंकृत

दिनांक ३०-६-२०१३ को रायपुर (छत्तीसगढ़) में हुए महासभा के २७वें सत्र के चुनाव में श्री जोधराजजी लड्ढा सभापति पद पर निर्वाचित हुए। इनके कार्यकाल में महासभा द्वारा कई समाजसेवा मूलक योजनाएं बनाई गई एवं उन्हें मूर्तरूप प्रदान किया गया, जिनमें माहेश्वरी मातोश्री सेवा प्रकोष्ठ योजना एवं माहेश्वरी सर्वांगीण विकास योजना प्रमुख है। दिनांक २६-२७ अक्टूबर २०१३ को सूरत गुजरात में महासभा की प्रथम कार्यसमिति बैठक में माहेश्वरी मातोश्री सेवा प्रकोष्ठ एवं माहेश्वरी सर्वांगीण विकास योजना का गठन हुआ। माहेश्वरी मातोश्री सेवा प्रकोष्ठ के तहत वर्तमान में ७७८ निराश्रित एवं जरूरतमंद बहनों को मासिक १००० रूपए सहायता दी गई एवं माहेश्वरी सर्वांगीण...

दीपोत्सव

दीपोत्सव

पर्व, उत्सव, त्यौहार आदि मनुष्य के जीवन में मनोरंजन, उल्लास व आमोद-प्रमोद के लिये बहुत अनिवार्य है, इस उद्देश्य से हमारी भारतीय संस्कृति में समय-समय पर पर्व, उत्सव व त्यौहार मनाने की परम्परा है, प्रत्येक त्यौहार के पीछे धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रिय व वैज्ञानिक कारण भी है। आई जगमग दिव्य दीपावली मंगलमय दीप जलाये जा हो घट-घट अन्तर उजियारा निज आनन्द रस छलकाये जा जो धर्म का, अपने कर्तव्य का पालन धैर्य से करते हैं, कभी विचलित नहीं होते, उनके यहाँ ही लक्ष्मी निवास करती है। आनन्द, उल्लास, प्रसन्नता, प्रेम बढ़ाने वाला पर्व है दिवाली। भारतीय संस्कृति के इस प्रकाशमय पर्व...

मुंबई

मुंबई

अग्रबंधु सेवा समिति मुंबई द्वारा महाराज अग्रसेन जी की ५१४३ जयंती के शुभ अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ भव्य शोभायात्रा का भी आयोजन रविवार दिनांक १४ अक्टूबर २०१८ किया जा रहा है। दोपहर ३ बजे विभिन्न आकर्षक झांकियों, १८ घोड़ों पर राजकुमारों, बैंड-बाजों आदि से सुसज्जित शोभायात्रा, मालाड सोसायटी प्रांगण, पोद्दार पार्व मालाड (पूर्व) से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए सायं ५.३० बजे कार्यक्रम स्थल सकल नारायण शर्मा सभागृह दत्त मंदिर रोड मिलीटरी के पास मालाड पूर्व पहुँचेगी, तत्पश्चात सायं ६.३० बजे से महाराजा अग्रसेन के जीवन पर आधारित भव्य मंचन का प्रारंभ होगा जो प्रदिप गुप्ता...

अग्रवाल विकास ट्रस्ट,

अग्रवाल विकास ट्रस्ट,

सूरत स्थित अग्रवाल विकास ट्रस्ट द्वारा महाराज अग्रसेनजी की ५१४२ वीं जयंती पर १० अक्टूबर २०१८ को बड़े धूमधाम एवं उल्लासपूर्ण वातावरण व भव्य रूप में आयोजन किया जा रहा है। जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में संस्कृति व खेल के प्रति जागरूकता को सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तरोतर अग्रसर होते हुए इस वर्ष भी अनेकों प्रकार के सांस्कृतिक, सामाजिक एवं मनोरंजन प्रतियोगिताएं गरबा, नाटक, पैशन शो, चित्रकला स्पर्धा, वाद-विवाद स्पर्धा आदि का आयोजन किया जा रहा है, साथ ही ट्रस्ट द्वारा इस बार पर्यावरण की सुरक्षा हेतु Recyle-Reuse का बढ़ावा देगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत होने वाली प्रतियोगिताओ का शुभारंभ...

शत्रुओं का विनाश करने वाला पर्व विजयादशमी

शत्रुओं का विनाश करने वाला पर्व विजयादशमी

यदि अपराह्न में श्रवण नक्षत्र हो तो वह और भी उत्तम माना जाता है, दोनों ही दिन यदि श्रवण नक्षत्र आ जाये तो वह और अधिक श्रेष्ठ होता है। श्रवण नक्षत्र में दशमी का योग ‘विजय-योग’ कहलाता है इसलिए इस दशमी को विजयादशमी भी कहते हैं, इस दिन अपराजिता देवी की भी पूजा की जाती है। विधि-विधान – इस दिन चार काम किये जाते हैं- (१) अपराजिता देवी का पूजन (२) सीमा का लांघना (३) शमी (खेजड़ी) का पूजन (४) देशान्तर जाने का प्रस्थान। पहले अपराजिता का पूजन किया जाता है। तीसरे प्रहर ईशान दिशा में गमन करके पवित्र स्थान पर...

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