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अगस्त समीक्षा

अगस्त समीक्षा

( हेलो! मेरा राजस्थान) शंकरलाल बडोला अध्यक्ष, राजनगर जैन मित्र मंडल, मुंबई राजसमन्द निवासी-मुंबई प्रवासी भ्रमणध्वनि: ९३२४३७०२५३ मुंबई मेरी कर्मभूमि है, यहां लगभग ३० वर्षों से प्रवासी हूँ, राजस्थान का ‘राजसमन्द’ मेरी जन्मभूमि है जहां मेरा जन्म १९६९ में हुआ व इंटर तक की शिक्षा यहीं सम्पन्न हुई, तत्पश्चात वाणिज्य संकाय से स्नातक की शिक्षा सेठ मथुरादास बिनानी राजकीय परिवार में धर्मपत्नी ३ पुत्रीयां व १ पुत्र है जो अभी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यहॉ हमारा ज्वेलरी का व्यवसाय है, वर्तमान में राजनगर जैन मित्र मंडल में अध्यक्ष पद पर सेवारत हूँ इसके पूर्व संस्था में विभिन्न पदों पर कार्यरत...

दाधीच समाज मुम्बई द्वारा महर्षि

दाधीच समाज मुम्बई द्वारा महर्षि

दाधीच समाज मुम्बई द्वारा महर्षि दधिची की ४९वीं जयन्ती बजाज हॉल एस. वी. रोड, मालाड वेस्ट, मुम्बई में रविवार, दिनांक १६ सितम्बर को बड़ी धूमधाम से मनायी गई, इस अवसर पर समाज के लोग परिवार सहित बड़ी संख्या में शामिल हुए, समाज अध्यक्ष डा.सी. एल. दाधीच ने सभी का तहेदिल से स्वागत किया तथा महर्षि दधिची के महान त्याग का अनुकरण करने की सलाह दी। इस अवसर पर भजन तथा राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुति एस एन. गग्गड एवं पार्टी द्वारा की गयी तथा जाने माने हास्यसम्राट कांकरोली निवासी सुनील जी व्यास, जो कि विशिष्ट अतिथि बतौर पधारे थे ने माँ पर...

शरद गोपीदासजी

शरद गोपीदासजी

क्लिन फाउंडेशन, श्वेत-केतु, कलादालन फाउंडेशन, सोनी एंड सोनी फिल्म निर्माता व मैत्री परिवार के तरफ से सत्कार समारोह व ‘कारवा सुनहरे गीतों का’ कार्यक्रम कविवर सुरेश भट्ट सभागृह रेशमबाग में आयोजित किया गया, सत्कार मुर्ती संदीप जोशी महाराष्ट्र राज्य लघु उद्योग महामंडल के नवनियुक्त अध्यक्ष(राज्यमंत्री दर्जा), कुनाल गडेकर दक्षिण मध्य सांस्कृतिक केंद्र भारत सरकार कार्यक्रम के समिति सदस्य व कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त व टाईम्स बीजनेस अचिवर्स अवार्ड समाजसेवी शरद बागडी थे। मुख्य अतिथी भाजपा शहर अध्यक्ष आमदार सुधाकर कोहळे, क्लिन फाउंडेशन के दीपक निलावार, श्वेत केतु के डॉ. प्रशांत काळे, मैत्री परिवार सचिव प्रमोद पेंडके व फिल्म ऐक्टर व डायरेक्टर...

दुर्गा पूजा

दुर्गा पूजा

एकम से आसोज सुदी नवमी तक देवी की पूजा नौ दिन तक की जाती है, इसीलिये उसे ‘नवरात्र’ या ‘महापूजा’ कहा जाता है। इसमें पूजा करना मुख्य कार्य है जबकि उपवास, एकासना (एक वक्त भोजन) नव व्रत आदि तो पूजा के अंग मात्र हैं, इसमें अपने-अपने कुल के आधार पर ही नवरात्रि के नियमों की अनुपालना करनी चाहिये, किसी के घर में पूजा-पाठ नहीं हो सकती तो कहीं और पूजा-पाठ करना अनिवार्य होता है, कुछ लोग तो केवल व्रत ही करते हैं जबकि वे पूजा-पाठ और हवन नहीं करवाते, वे अपने-अपने कुल-धर्म के अनुसार इस व्रतोत्सव का अनुष्ठान कर सकते हैं।...

अक्टूबर समीक्षा

अक्टूबर समीक्षा

रामअवतार अग्रवाल व्यवसायी व समाजसेवी सीकर निवासी-कोलकाता प्रवासी भ्रमणध्वनि: ९८३०५५६६५२ हाराज अग्रसेन हम अग्रवालों के पूर्वज है, हमारे लिए पूज्यनीय हैं, उनके विचार आज भी समाज में प्रतिपादित हो रहे हैं। मोदी जी तो आज कहते हैं ‘सबका साथ-सबका विकास’ पर युग पुरूष अग्रसेन जी ने ‘एक र्इंट-एक रूपया’ सिद्धांत के माध्यम से सम्पूर्ण समाज के विकास को सुनिश्चित किया। आज भी उनके वंशजों द्वारा चाहे वे कहीं भी निवास करते हों, इस विचारों का अनुसरण करते आ रहे हैं। समाज के लोग अपनी योग्यता अनुरूप इसका लाभ उठाने में सक्षम हैं। आज इस स्वार्थ की दुनिया में लोग अपने में...

सितम्बर समीक्षा

सितम्बर समीक्षा

( हेलो! मेरा राजस्थान ) जगत नारायण जोशी पूर्व राज्यमंत्री सलाहकार इंदौर, मध्यप्रदेश, भारत भ्रमणध्वनि: ९४२५०५४९७० महाष्र् दधीच न सिर्प दानवीर रहे बल्कि श्रेष्ठ न्यासी के रूप में समाज के सम्मुख उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया, देवताओं द्वारा सुरक्षित रखने हेतु दिए गए दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की रक्षा के लिए अपने तपोबल से उन्हें अपने शरीर में धारण किया, जब देवताओं को इस शस्त्रों की आवश्यकता हुई तो अपने शरीर का त्याग कर वङ्का रूपी शस्त्र प्रदान किया। महर्षि दधीच को प्रथम न्यासी के रूप में जाना जाता है, उन्होंने मानव कल्याण हेतु व वत्रासुर के कष्टों से समाज की रक्षार्थ अपने शरीर...

सुख समृध्दि व शक्ति–उपासना का महापर्व नवरात्र

सुख समृध्दि व शक्ति–उपासना का महापर्व नवरात्र

भूत प्राणियों में शक्तिरुप होकर निवास करती है उसको पृथ्वी के समस्त प्राणियों का नमस्कार है। सृष्टि की आदि शक्ति है मॉ दुर्गा। देवताओं पर मॉ भगवती की कृपा बनी रहती है। समस्त देव उन्हीं की शक्ति से प्रेरित होकर कार्य करते हैं, यहां तक ब्रह्मा, विष्णु और महेश बिना भगवती की इच्छा या शक्ति से सर्जन, पोषण एवं संहार नहीं करते, परमेश्वरी के नौ रुप हैं, इन्हीं की नवरात्रा में पूजा होती है। धर्माचार्यों के अनुसार साल–भर में चार बार नवरात्रा व्रत पूजन का विधान है। चैत्र, आषाढ, अश्विन और माघ का शुक्ल पक्ष, इसमें चैत्र व अश्विन प्रमुख माने...

मानव सेवा का केंद्र अग्रसेन धाम

मानव सेवा का केंद्र अग्रसेन धाम

दिनांक २५ जनवरी सन् २००९, देश और समाज की वर्तमान परिस्थिति में, संस्कृति और संस्कारों के विघटन को रोकने हेतु, स्त्री शिक्षा की अनिर्वायता को देखते हुए कर्मयोगी पुष्करलाल केडिया के मन में एक उच्च स्तरीय महिला विश्वविद्यालय की स्थापना का संकल्प उदय हुआ। संकल्प को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए सर्वप्रथम भूमि की आवश्यकता होती है, कोलकाता महानगर के आसपास उपयुक्त भूमि-खंड प्राप्त होना भी एक समस्या है, इस समस्या को हल करने के लिए ईश्चरीय प्रेरणा स्वरूप आगे आये प्रसिद्ध उद्योगपति श्री प्रह्लाद राय गोयनका, उन्होंने हावड़ा के बागनान में अपनी १०० बीघा जमीन दान देने की इच्छा...

एक रुपया

एक रुपया

अपने युग की एक महान विभूति थे, वे एक कुशल राजनीतिज्ञ थे, पराक्रमी योद्धा थे और प्रजा के हितकारी सह्रदय राजा थे। अपनी प्रजा एवं राज्य की सुरक्षा के लिये उन्होंने सुरक्षित अग्रोहा नगर बसाया, सुदृढ़ कोट से घिरा नगर, जिसमें करीब सवा लाख से भी अधिक घरों की बस्ती थी, उनके सबल हाथोें में प्रजा सुरक्षित थी, इसीलिए नागरिक निश्चिन्त होकर अपने काम-धन्धे में लगे रहते थे। `अग्रोहा’ पूर्णत: वैश्य-राज्य था, व्यापारियों, किसानों, कर्मकारों शिल्पकारों और उद्योग-धन्धे करने वालों का राज्य। वैश्य होते हुए भी महाराज अग्रसेन क्षत्रियों से भी अधिक कुशलता से शासन का संचालन करते थे। राज्य दिनों-दिन...

महाराजा अग्रसेन का युगीन संदेश

महाराजा अग्रसेन का युगीन संदेश

महापुरूष अपने जीवन में कुछ ऐसे आदर्शों की स्थापना करते हैं जो चिर युगीन हो जाते हैं, आने वाले युगों में राष्ट्र या समाज उनका अनुकरण कर अपने जीवन को मुदमंगलमय बनाता है, वे महापुरूष मात्र वाणी से आदर्शों की व्याख्या नहीं करते अपितु उन्हें अपने जीवन में कर्म से भी उतारते हैं। ऐसे महापुरूषों को हम मर्यादा पुरूषोत्तम राम, योगेश्वर कृष्ण, बुद्ध, महावीर स्वामी, चाणक्य, महात्मा गाँधी आदि के नाम से जानते हैं। ऐसे ही युगपुरूषों में महाराजा अग्रसेन का नाम अत्यन्त श्रद्धा से लिया जाता है। महाराज अग्रसेन का उद्भव द्वापर एवं कलियुग के संधिकाल में हुआ था। महाभारत...

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