Category: श्री बाबा गंगाराम की परम आराधिका

भाई-बहन के पवित्र बंधन का त्योहार रक्षाबंधन

भाई-बहन के पवित्र बंधन का त्योहार रक्षाबंधन

‘रक्षाबंधन’ का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर बलि राजा के अभिमान को इसी दिन चकनाचूर किया था इसलिए यह त्योहार ‘बलेव’ नाम से भी प्रसिद्ध है। महाराष्ट्र राज्य में नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से यह त्योहार विख्यात है, इस दिन लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते हैं। ‘रक्षाबंधन’ के संबंध में एक अन्य पौराणिक कथा भी प्रसिद्ध है। देवों और दानवों के युद्ध में जब देवता हारने लगे तब वे देवराज इंद्र के पास गए। देवताओं को...

जन आस्था का केन्द्र: श्री पंचदेव मन्दिर- झुंझुनूं कलियुग के चमत्कारी देव : झुंझुनूंवाले बाबा गंगाराम

जन आस्था का केन्द्र: श्री पंचदेव मन्दिर- झुंझुनूं कलियुग के चमत्कारी देव : झुंझुनूंवाले बाबा गंगाराम

राजस्थान के झुंझुनूं स्थित श्री पंचदेव मन्दिर के विष्णुअवतारी बाबा गंगाराम के प्रति लोगों की आस्था दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कलियुग में भक्तों के कल्याण के लिए प्रगट हुये बाबा गंगाराम प्रत्यक्ष देव हैं, इनके चमत्कारों को गिनना पृथ्वी के रज-कणों को गिनने के सामान है, अपने परम आराधक ‘भक्त शिरोमणि श्री देवकीनन्दन एवं शक्ति स्वरूपा देवी गायत्री’ के माध्यम से बाबा ने संसार को भक्ति और त्याग का जो दिव्य सन्देश दिया, वह अविस्मरणीय है। बाबा गंगाराम जी का अवतरण और लीलाएं: भारत भूमि का कोना-कोना परम पवित्र एवं आध्यात्मिकता के तेज से परिपूर्ण है। समय-समय पर इस पावन...

अपनी संस्कृति, मातृभाषा से जुड़े रहने के संदेश के साथ  सुरंगो राजस्थान कार्यक्रम संपन्न

अपनी संस्कृति, मातृभाषा से जुड़े रहने के संदेश के साथ सुरंगो राजस्थान कार्यक्रम संपन्न

कोलकाता: महानगर का एक हिस्सा पूरी तरह से राजस्थान के रंगों में डूब गया, जब राजस्थान की संस्कृति झलकाने वाले कार्यक्रम ‘सुरंगों राजस्थान’ का आयोजन हुआ। सीकर नागरिक परिषद, कोलकाता एवं सीकर जिला वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा सावन के महीने में ‘सुरंगों राजस्थान’ का द्वितीय संस्करण धूमधाम से संपन्न हुआ। कोलकाता के गोलाघाटा में द डिविनिटी पैवेलियन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को अपनी मातृभाषा के प्रति जागरुक करना है ताकि आधुनिक दौर में भी सभी अपनी मातृभाषा, संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहें। इस आयोजन में विभिन्न तरह के पारंपरिक रंगारग कार्यक्रम, लोक-नृत्य, संगीत आदि पेश किए गए। इस...

स्वतंत्रता दिवस     १५ अगस्त १९४७

स्वतंत्रता दिवस १५ अगस्त १९४७

स्वतंत्रता दिवस भारतीयों के लिये एक बहुत ही खास दिन है क्योंकि, इसी दिन वर्षों की गुलामी के बाद ब्रिटिश शासन से भारत को आजादी मिली थी। भारतीय स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक और महत्वपर्ू्ण दिन के बारे में अपनी वर्तमान और आने वाली पीढियों को निबंध लेखन, भाषण व्याख्यान और चर्चा के द्वारा प्रस्तुत करते हैं। १५ अगस्त १९४७, भारतीय इतिहास का सर्वाधिक भाग्यशाली और महत्वपर्ू्णं दिन था, जब हमारे भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर भारत देश के लिये आजादी हासिल की। भारत की आजादी के साथ ही भारतीयों ने अपने पहले प्रधानमंत्री का चुनाव पंडित...

कैलाश धाम ( बिशनगढ़ गांव,जालोर)

कैलाश धाम ( बिशनगढ़ गांव,जालोर)

बिशनगढ़ गांव में मुख्य नाकोडा रोड पर स्थित विशालकाय शिव प्रतिमा एवं ३५ बीघा में फैला हुआ मंदिर परिसर कैलाशधाम ‘जालोर’ की विशेष पहचान बन गया हैं जो कि है राजस्थान का कैलाश धाम। ‘जालोर’ से सिर्फ ५ किलोमीटर दूर, बारिश में शिव प्रतिमा का स्वरूप और भी निखर जाता है। यहां का नजारा देखते ही बनता है। माहौल ऐसा कि ‘सत्य ही शिव हैं, शिव ही सुंदर हैं।’ विदित हो कि ७२ फीट ऊंची शिव की प्रतिमा एक किलोमीटर दूर से ही नजर आने लगती है। बिशनगढ़ गांव में बने शिव धाम में भक्तों का तांता लगा रहता था। सावन...

जालोर जिले की विशेषताएं

जालोर जिले की विशेषताएं

जालोर ग्रेनाइट उद्योग पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, जालोर, बाडमेर, पाली तथा सिरोही जिलों में ग्रेनाइट उद्योग अत्यन्त विकसित अवस्था में है, जिनमें ‘जालोर’ जिला सबसे आगे है, इस पत्थर की आयल्स बनाने का काम सबसे पहले यहीं आरम्भ हुआ। भारत सरकार के भू सर्वेक्षण विभाग की एक रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद राजस्थान सरकार का ध्यान इस ओर गया, इस रिपोर्ट में ग्रेनाइट पत्थर के क्षेत्रों को दर्शाया गया था। वर्ष १९६५ में राजस्थान सरकार ने खान एवं भू विभाग के माध्यम से एक ग्रेनाइट इकाई ‘जालोर’ में स्थापित की, जिसमें समस्त काम हाथ से होता था। वर्ष १९७१ में इसे...

जबालीपुर यानी जालोर

जबालीपुर यानी जालोर

‘जालोर’ राजस्थान राज्य का एक ऐतिहासिक शहर है। यह राजस्थान की सुवर्ण नगरी और ग्रेनाइट सिटी के नाम से प्रसिद्ध है। यह शहर प्राचीनकाल में ‘जबालीपुर’ के नाम से जाना जाता था। ‘जालोर’ जिला का मुख्यालय यहाँ स्थित है। लूनी नदी की उपनदी सुकरी के दक्षिण में स्थित ‘जालोर’ राजस्थान का ऐतिहासिक जिला है। पहले यह बहुत बड़ी रियासतों में एक था। जालोर रियासत, चित्तौड़गढ़ रियासत के बाद अपना स्थान रखता था, पश्चिमी राजस्थान में एक प्रमुख रियासत थी। इतिहास: प्राचीन काल में ‘जालोर’ को जबालीपुर के नाम से जाना जाता था-जिसका नाम हिंदू संत जबालीपुर (एक विद्वान ब्राह्मण पुजारी और...

फल सब्जियां बनाएँ बेहतर स्वास्थ्य

फल सब्जियां बनाएँ बेहतर स्वास्थ्य

दही को चहरे व अन्य हिस्सों की त्वचा पर धीरे-धीरे मलें। करीब १० मिनट बाद शीतल जल से स्नान करें। शहद : यह आपकी त्वचा को नर्म बनाता है। यदि सम्भव हो तो इसे चेहरे पर नियमित तौर पर लगाएं। फिर कुछ देर बाद चेहरा धो लें। इससे आपकी त्वचा मुलायम व कांतिमय बनेगी। गुलाब जल : यह एक बेहतरीन स्किन केयर पदार्थ है। गुलाब जल को रुइ के फाहे की सहायता से न केवल चेहरे और हाथ-पैरों की त्वचा पर ही नहीं बल्कि सिर पर भी लगा सकती हैं जिससे बालों में जमा गंदी साफ हो। केला : उम्र बढाने...

एक और कदम अपनी ओर -सरोज राठी चैन्नई, तामिलनाडु, भारत

एक और कदम अपनी ओर -सरोज राठी चैन्नई, तामिलनाडु, भारत

मैं सरोज राठी चेन्नई प्रवासी हूं। ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका बहुत ही सशक्त साधन है, अपनी बात समाज तक पहुंचाने के लिए… मैं काफी दिनों से विचार कर रही थी एक बात समाज में पहुंचाने को, हमलोग सभी भारत के वासी सनातनी हैं। हमारी सभ्यता संस्कृति विरासत को हम अपने ही हाथों मसल देंगे तो कौन सम्भालने आएगा? इसी कड़ी में एक बात का विचार आ रहा है, हमारी मजबूत कड़ी हमारे त्योहार पर्व आदि हैं। सभी त्यौहार हमलोग धूमधाम से मनाते हैं। सारे त्यौहार हमलोग अपने महीनों की तिथियों के अनुसार ही मनाते हैं, साल के शुरुआत में एक सवाल हमारे...

भगवान महेश की महत्वपूर्ण बातें

भगवान महेश की महत्वपूर्ण बातें

* आदिनाथ शिव : सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें ‘आदिदेव’ भी कहा जाता है। ‘आदि’ का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम ‘आदिश’ भी है। * शिव के अस्त्र-शस्त्र : शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था। * शिव का नाग : शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है। * शिव की अर्द्धांगिनी : शिव की पहली पत्नी सती ने...