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श्री बाबा गंगाराम की परम आराधिका

श्री बाबा गंगाराम की परम आराधिका

श्री बाबा गंगाराम की परम आराधिका बाबा गंगाराम की अनन्य साधिका एवं भक्त शिरोमणि श्री देवकीनंदन की सहधर्मिणी और श्री पंचदेव मंदिर झुंझुनू की संस्थापिका माता गायत्री देवी अपने लाखों-लाखों भक्तों से विदा लेते हुए मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी दिनांक 29 नवम्बर 2017 को अपने नश्वर शरीर को त्यागकर बाबा के धाम के लिए महाप्रयाण कर गयी. मंदिर में एक ओर जहाँ भक्तवृंद घंटे,नगाड़े और शंख की ध्वनि के साथ बाबा की आरती में मग्न थे,वहीं माँ गायत्री बाबा गंगाराम का नाम उच्चारित करते हुए इस मृत्युलोक को छोड़कर परम ज्योति में लीन हो गयी. लाखों भक्तों की जीवन प्रेरणा आध्यात्म शक्ति... ...
श्राद्ध कर्म से मिलती पूर्वजों को मुक्ति

श्राद्ध कर्म से मिलती पूर्वजों को मुक्ति

पितृ पक्ष का महत्व : पौराणिक ग्रंथों में वर्णित किया गया है कि देवपूजा से पहले जातक को अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिये। पितरों के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में जीवित रहते हुए घर के बड़े बुजूर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध कर्म किये जाते हैं। इसके पीछे यह मान्यता भी है कि यदि विधिनुसार पितरों का तर्पण न किया जाये तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती और उनकी आत्मा मृत्युलोक में भटकती रहती है। पितृ पक्ष को मनाने का ज्योतिषीय कारण भी है। ज्योतिषशा में पितृ दोष काफी ...
उद्धारक है गणेश संकष्ट चतुर्थी

उद्धारक है गणेश संकष्ट चतुर्थी

ऋषियों ने स्कन्द (स्वामी कार्तिकेय) से पूछा- ‘हे देव! दरिद्रता और दु:खों से आतुर, दुश्मनों से दु:खी, धनहीन, पुत्रहीन, बेघर, विद्या से रहित दु:खी व्यक्ति अपने सुख के लिए, उपद्रवों से बचने के लिए,अपने कल्याण के लिए कौन से व्रत का अनुष्ठान करें जो उनके लिए सिद्धिदायक हो, कृपा करके हमें यह बताइये!’यह सुनकर स्वामिकार्तिकेय बोले, ‘हे मुनियों! संकट हरने वाला, सम्पत्ति और सुख देने वाला, एक उत्तम व्रत मैं आपको बताता हूँ जिसके करने से मनुष्य संकटों से पार होकर सुखी बनता है ...
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव सम्पूर्ण मण्डल में, घर-घर में, मन्दिर-मन्दिर में मनाया जाता है, अधिकतर लोग व्रत रखते हैं और रात को बारह बजे ही ‘पंचामृत या फलाहार’ ग्रहण करते हैं, फल, मिष्ठान,वस्त्र, बर्तन, खिलौने और  रुपये लुटाए जाते हैं, जिन्हें प्राय: सभी श्रद्धालु लूटकर धन्य होते हैं। गोकुल, नन्दगाँव, वृन्दावन आदि में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बड़ी धूम मचती है। छबीले का छप्पन भोग श्रीकृष्ण आजीवन सुख तथा मानव सेवा में रहे, इसलिए जन्माष्टमी को इतने शानदार ढंग से मनाया जाता है,इस दिन अनेक प्रकार के मिष्ठान्न, पकवान बनाए जाते हैं। जैसे लड्डू, चकली ...